प्रदेश में संचालित किए जा रहे हॉटमिक्स प्लांट पर अब राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की भी निगाह रहेगी। दिल्ली की संस्था फ्रेंड्स की ओर से शिकायत को सुनवाई के लिए एनजीटी ने स्वीकार कर लिया है। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी।
फ्रेंड्स के महासचिव शरद तिवारी और अन्य की ओर से दायर की गई याचिका में कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड में कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में पिछले कुछ सालों में हॉटमिक्स प्लांट की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
शिकायत है कि कई हॉटमिक्स प्लांट नियमों को ताख पर रखकर संचालित किए जा रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि कई स्थानों पर हॉटमिक्स प्लांट का विरोध भी हुआ, लेकिन प्रशासन विकास की दुहाई देकर इस विरोध को नजरअंदाज कर रहा है।
द्रप्रयाग में तो जिलाधिकारी कार्यालय के ठीक सामने ही प्लांट स्थापित किया गया है। इसी तरह गढ़वाल में बिरही में भागीरथी नदी के किनारे और स्कूल के समीप एक हॉटमिक्स प्लांट चल रहा है। सीमा सड़क संगठन की ओर से संचालित इस प्लांट का स्थानीय लोग विरोध भी कर रहे हैं।
शिकायतकर्ता के मुताबिक हॉटमिक्स प्लांट से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। इस धुएं में कैंसर को बढ़ावा देने वाले तत्व भी शामिल हैं। प्रदेश में कई दुर्लभ जड़ी बूटियां हैं और सड़क निर्माण की इस प्रक्रिया में ये जड़ी बूटी नष्ट हो रही हैं।
शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि प्रदेश में हॉटमिक्स प्लांट को संचालित करने में नियमों और कानून की भी अनदेखी की जा रही है। ऐसे में एनजीटी से आग्रह किया गया है कि हॉटमिक्स प्लांट के संचालन पर रोक लगाई जाए या फिर इनकी संख्या सीमित की जाए।
धुआं लोगों के स्वास्थ्य को पहुंचा रहा नुकसान
हॉटमिक्स प्लांट से निकलने वाला धुआं लोगों के स्वास्थ्य को खासा नुकसान पहुंचा रहा है। हाइड्रोकार्बन और अन्य उत्पादों के जलने पर कैंसर बढ़ाने वाले तत्व उत्पन्न होते हैं।
-अजय रावत, पर्यावरणविद्