रामनगर (नैनीताल)। गढ़वाल और कुमाऊं को जोड़ने के लिए प्रस्तावित नेशनल हाईवे को सैद्धांतिक स्वीकृति मिले छह साल बीत गए लेकिन अभी तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिलने से मामला अधर में लटका है। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही सर्वे का काम शुरू होगा। इस हाईवे के बनने से कुमाऊं के लोग यूपी में प्रवेश किए बिना राजधानी देहरादून आवाजाही कर सकेंगे।
रामनगर के वरिष्ठ समाजसेवी हरीश चंद्र सती ने 30 दिसंबर 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर इस नेशनल हाईवे की मांग की थी। समाजसेवी के पत्र पर पीएमओ ने लक्ष्मण झूला से रानीखेत तक (करीब 300 किलोमीटर लंबे) नए नेशनल हाईवे का प्रस्ताव सड़क परिवहन मंत्रालय से मांगा था। सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से बताया कि मई 2016 में इस हाईवे को सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई थी। लक्ष्मण झूला (ऋषिकेश) से दुगड्डा-नैनीडांडा-शंकरपुर-मोहान-भतरौंजखान-रानीखेत तक मार्ग को नेशनल हाईवे बनाने का प्रस्ताव अधर में लटक गया है। छह साल बीतने के बाद भी इसकी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी है। अंतिम स्वीकृति मिलने पर नेशनल हाईवे को डबल लेन किया जाएगा।
लक्ष्मणझूला-दुगड्डा-नैनीडांडा-शंकरपुर-मोहान-रानीखेत मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग में परिवर्तित करने को अभी केवल सैद्धांतिक स्वीकृति सड़क परिवहन मंत्रालय से मिल चुकी है लेकिन अंतिम स्वीकृति अब तक नहीं मिली है। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही मार्ग का सर्वे आदि कार्य किया जाएगा।
अरुण पांडेय, अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग वृत्त, लोनिवि
लक्ष्मणझूला, दुगड्डा, नैनीडांड़ा, शंकरपुर, मोहान, भतरौंजखान, रानीखेत तक 300 किमी की राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की सैद्धांतिक मंजूरी 2016 में मिली थी लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है। सरकार इसे अंतिम स्वीकृति दिलाए ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके।
हरीश चंद्र सती, वरिष्ठ समाजसेवी