आपदा पीड़ितों की ओर से लिए गए ऋण पर ब्याज माफ करने के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि जिन पीड़ितों ने प्रत्यावेदन दे रखें हैं उन पर सरकार निर्णय ले। कोर्ट ने सरकार को मामले में छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तिथि नियत की है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। बाजपुर जिला ऊधम सिंह नगर निवासी बलराज पासी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि केदारनाथ सहित विभिन्न स्थानों पर पर वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद वहां के लोगों ने घर, कृषि, होटल व्यवसाय के लिए ऋण लिया था। याचिकाकर्ता ने ऐसे सभी आपदा पीड़ितों का तीन वर्ष का ब्याज माफ करने की प्रार्थना की थी।
याचिकाकर्ता की सीएम की ओर से 13 जनवरी, 2015 को गंगोत्री में होटल व्यवसायियों का एक साल का ऋण माफ करने की घोषणा का उल्लेख करते हुए कहा गया कि सरकार आपदा पीड़ितों के साथ भेदभाव कर रही है। क्योंकि सीएम की ओर से यमुनोत्री में आपदा पीड़ितों के लिए कोई घोषणा नहीं की गई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि जब तक चार धाम यात्रा सुचारु रूप संचालित नहीं होती और वहां के लोगों का व्यवसाय नहीं चल पड़ता, तब तक तीन साल के लिए उनका ऋण माफ कर दिया जाए।