हाईकोर्ट ने सुशीला तिवारी अस्पताल व राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के मामले में दायर जनहित याचिका में सुनवाई के बाद कडा रूख अपनाते हुए कहा कि अस्पताल की व्यवस्था वास्तव में चरमराई है।
कोर्ट ने कहा कि जो वीआईपी मरीज है उनके लिए सूचना पर व्यवस्थाएं कुछ देर के लिए दुरूस्थ कर दी जाती है लेकिन आम मरीजों को समुचित उपचार तक किया नहीं जाता।
कोर्ट ने कहा जो आर्थिक रूप से सक्षम होता है उसे भी निजी अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है। कोर्ट ने कुछ निजी अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए कुछ लोगों का हित जुडे होने की बात कहते हुए सरकार को आदेशित किया है कि वह अपने शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट को इस संबंध में बताए।
कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि स्टाफ, मशीनरी और जीवन रक्षक दवाओं की कमी के लिए क्या रणनीति बनाई है। कोर्ट ने 22 अगस्त की तिथि नियत करते हुए सरकार को विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हल्द्वानी निवासी विकास भगत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सुशीला तिवारी अस्पताल व राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है और मेडिकल कालेज मरीजों को केवल रेफर करने का केंद्र बनकर रह गया है।
याचिका में कहा कि पिछले दिनों 6 गर्भवती महिलाओं का उचित उपचार न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई थी तथा आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। याचिका में कहा कि वहां पर 57 विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली पडे है और 28 से ऊपर चिकित्सकीय मशीन खराब पडी है।
जिससे गरीब मरीजों को इलाज के अभाव में दर दर भटकना पड रहा है। कुमाऊं के 6 जिले, गढवाल का जिला चमोली व उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद व रामपुर जिले से मरीज बेहतर इलाज की अपेक्षा में यहां आते है पर यहां से उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
पहाडी जिलों में होने वाली दुर्घटना के घायलों को यहां लाया जाता है पर यहां एक भी ट्रामा सेंटर नहीं है। जिससे घायलों को इलाज के अभाव में दम तोडना पडता है। हृदय के मरीजों की बढती संख्या को देखते हुए एक कैथलैब के निर्माण की जनता की मांग पर सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है। याचिका में कहा कि कर्मचारियों की हडताल के चलते अकसर व्यवस्थाएं चौपट हो जाती है।
क्योंकि पूर्व से ही मेडिकल कालेज में स्टाफ का अभाव है। अस्पताल में सफाई, फर्नीचर, बैड, मरीजों के बिस्तर आदि दयनीय दशा में है। जबकि यह मेडिकल कालेज पूरे कुमाऊं के सबसे बडे अस्पताल के रूप में खोला गया था।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 अगस्त की तिथि नियत करते हुए सरकार को विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए।