एचएमटी कारखाने को बंद करने के आदेश पर बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने से कारखाने के कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। यूनियनों ने इसे कर्मचारियों की जीत बताया है। कर्मचारियों में कारखाने के दिन एक बार फिर बहुरने की उम्मीद जागी है।
केंद्र की आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) की बैठक में एचएमटी कारखाना रानीबाग को बंद करने का निर्णय इसी वर्ष 6 जनवरी को लिया था। सरकार के इस आदेश से करीब 512 कर्मचारी प्रभावित हुए थे।
सरकार ने कर्मचारियों को वीआरएस और वीएसएस लेने का 31 मार्च तक का समय दिया था। साथ ही यह चेतावनी भी दी थी कि जो कर्मचारी वीआरएस या वीएसएस के लिए आवेदन नहीं करेगा उसके खिलाफ औद्योगिक विवाद अधिनियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इसके उपरांत 31 मार्च 2016 तक करीब 238 कर्मचारियों ने वीआरएस ले लिया था। बाद में कारखाना उच्च प्रबंधन की ओर से दो -तीन बार और मौके दिए गए। इस तरह कुल मिलाकर 512 में से 146 कर्मचारी ही शेष बचे।
एचएमटी इंपलाइज यूनियन के महामंत्री एवं इंटक के जिलाध्यक्ष प्रकाश मिश्रा ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से कारखाना कर्मचारियों की जीत हुई है तथा उम्मीद जगी है कि कारखाना एक बार फिर शुरू हो सकता है।
उन्होंने कहा कि कारखाना कर्मचारियों के साथ हुए प्रबंधन द्वारा किए गए अन्याय के खिलाफ शीघ्र ही इंटक की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
इधर, एचएमटी कामगार संघ ने अध्यक्ष भगवान सिंह ने बताया कि 29 नवंबर को सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने एचएमटी के चेयरमैन गिरीश कुमार से वार्ता कर बंद कारखाने को खुलवाया था, इसकेबाद अब कारखाने को लेकर हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने से कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है।
कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को सांसद कोश्यारी को आवास पर जाकर उनका स्वागत कर आभार जताया। इस दौरान संघ अध्यक्ष के अलावा महामंत्री मुकेश तिवारी, भाजपा नेता दिनेश खुल्बे, सचिन साह, जगत सिंह चिम्याल आदि मौजूद रहे।