नैनीताल। हाईकोर्ट ने वित्तीय सहायता से स्मार्ट क्लास टेक्नोलॉजी के तहत उत्तराखंड के दो लाख बच्चों के लिए 709 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास टेक्नोलॉजी की सुविधा उपलब्ध कराने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकार, राज्य सरकार के साथ ही शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, राज्य नियोजन संस्थान के डॉ. मुकुल कुमार सती एवं एक प्राइवेट कंपनी की डायरेक्टर डॉ. समिता नटराजन को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि पूर्व में भारत सरकार की 90 % वित्तीय सहायता से स्मार्ट क्लास टेक्नोलॉजी के तहत उत्तराखंड के दो लाख बच्चों के लिए 709 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास टेक्नोलॉजी की सुविधा उपलब्ध कराई जानी थी।, लेकिन राज्य के इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एजेंसी (आइटीडीए) के अनुमोदन पर इस स्मार्ट क्लास टेक्नोलॉजी को परिवर्तित करके वर्चुअल क्लास टेक्नोलॉजी कर दिया गया था। याचिका में कहा कि आई क्यूब कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए यह परिवर्तन किया गया है। इस परिवर्तन को आर मीनाक्षी सुंदरम द्वारा बार बार नहीं माना गया। लगातार तीन बार राज्य के शिक्षा मंत्री ने आर मीनाक्षी सुंदरम को स्मार्ट क्लास से वर्चुअल क्लास टेक्नोलॉजी में जाने के लिए कहा। बाद में केंद्र सरकार द्वारा भी मानक में परिवर्तित कर योजना को वर्चुअल क्लास रूम टेक्नोलॉजी करने को कहा। लेकिन शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने हर ऐसे आदेश की अवहेलना ही की। याचिका में कहा कि इसमें धनराशि को ठिकाने लगाए जाने की कवायद की जा रही है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार के साथ अन्य सभी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।