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विद्यालयों के विलय के 14 फरवरी के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक

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प्रतीकात्मक फोटो।
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने प्राथमिक विद्यालय और जूनियर हाईस्कूलों के विलय के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद प्रदेश सरकार की ओर से 14 फरवरी 2020 को जारी शासनादेश पर रोक लगा दी है।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। शांतिपुरी ऊधमसिंह नगर निवासी पूर्व दर्जा मंत्री गणेश उपाध्याय ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि शिक्षा विभाग ने 14 फरवरी 2020 को शासनादेश जारी कर कहा कि जनपद में चार किमी तक की परिधि के बेसिक विद्यालयों का माध्यमिक विद्यालयों में विलय की व्यवस्था की जा रही है, जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धाराओं का खुला उल्लंघन है।
याचिका में कहा कि भारत सरकार की ओर से पारित अधिनियम में प्रावधान है कि बच्चे के निवास से एक किमी की दूरी पर प्राथमिक विद्यालय तथा 3 किमी की दूरी पर उच्च प्राथमिक विद्यालय होना चाहिए। याचिका में कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इसी को आधार मानकर विद्यालय खोले थे, लेकिन इन विद्यालयों की निर्वाचित प्रबंधन समितियों को बिना किसी आदेश के अस्तित्व विहीन किया जा रहा है।
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याचिका में कहा कि केवल ऊधमसिंह नगर के 1100 विद्यालयों में से 398 विद्यालयों को बंद कर उनका विलयीकरण मॉडल स्कूलों में करना सरकार की सोची समझी साजिश है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि इन प्रत्येक स्कूलों में बच्चों की संख्या सौ से अधिक है। यदि विलयीकरण होता है तो बच्चों को अपने घरों से कई किलोमीटर दूर पढ़ने के लिए जाना पड़ सकता है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस संबंध में सरकार की ओर से 14 फरवरी 2020 के शासनादेश पर रोक लगा दी।
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