इंटरटेनमेंट डायरी
न्यू रिलीज- पानीपत
मुख्य शीर्षक- जंग तो मर्द के अहम का खेल है
ठीक इंटरवल के बाद अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली की सेना और पेशवा सदाशिव राव की सेना आमने-सामने हैं। ये सभी पिछले एक महीने से यमुना की बाढ़ कम होने का इंतजार कर रहे हैं। मराठा सेना के पास रसद समाप्ति की ओर है तो सदाशिव के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। इस बीच मदद की गुहार लेकर पेशवा की पत्नी पार्वती बाई शकीना बेगम के दरबार में जाने की इच्छा प्रकट करती हैं तो दोआब क्षेत्र के शासक सूरजमल और मल्हार राव कहते हैं कि वहां से उम्मीद रखना बेइमानी होगी। पार्वती बाई जिद करती हैं कि मुझे इजाजत दी जाए क्या पता वो मान जाएं।
शकीना बेगम के दरबार में पार्वती बाई पहुंचती हैं और आपा के संबोधन से अपनी बात रखकर मदद की गुहार करती हैं। बेगम पलटकर जवाब देती हैं जंग तो मर्द के अहम का खेल है पार्वती। वह खुद तो चले जाते हैं और पीछे बेवा और महरूम औलाद छोड़ देते हैं।
पार्वती कहती हैं कि यह जंग मातृभूमि के स्वाभिमान के लिए है। मैं एक हजार कोस की दूरी तय करके अपने पति का साथ देने इस जंग में आई हूं। मुझे अपने पति पर यकीन है। मैं और आप कोई पेशवा या शाही खानदान से तो हैं नहीं तो हमसे बेहतर कौन जान सकता कि जंग में असल नुकसान आम आदमी का ही होता है। इसी दर्द को जानकर तो मेरे पति मातृभूमि की रक्षा के लिए निकले हैं। चलिये आप मेरी मदद न करें लेकिन एक बात का जवाब दीजिए और मैं लौट जाऊंगी।
अगर आज आपके शौहर जिंदा होते तो उनका फैसला क्या होता। जवाब आया कि यह फक्र की बात है पार्वती बाई जो आप इस युद्ध में पति के संग हैं। अब हमारा जमीर इस नेक काम में खामोश रहने की इजाजत कैसे दे सकता है। इसके बाद पेशवा रानी रसद और बेगम की पांच हजार सैनिकों की सेना के साथ रवाना हो जाती हैं। शुक्रवार को पानीपत फिल्म पांच शो पर रिलीज हुई। दर्शकों का उत्साह पहले शो से ही भरपूर था। फर्स्ट शो आधा पैक था। जबकि दूसरी फिल्म ‘पति पत्नी और वो’ के शो को भी 40 से 45 प्रतिशत तक दर्शक मिले।