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हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट मामले में दायर याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

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नैनीताल। हाईकोर्ट ने चमोली जिले में ऋषि गंगा और तपोवन-विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजनाओं के लिए वन और पर्यावरण मंजूरी रद्द करने और चमोली जिले में चिपको आंदोलन की नेतृत्वकर्ता गौरा देवी के रैणी गांव के पुनर्वास की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया। कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए याचिकाकर्ता पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
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कोर्ट ने यह जुर्माने की राशि अधिवक्ता कल्याण कोष में जमा करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान एनटीपीसी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया गया कि तपोवन विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना राज्य और एनटीपीसी के लिए अत्यधिक महत्व की है। प्रोजेक्ट हमेशा पर्यावरणीय मंजूरी के साथ काम करता है। कहा कि याचिकाकर्ता वास्तविक और ईमानदार इरादों से आश्वस्त नहीं था। कहा कि ऐसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को केवल शिकायतों के आधार पर नहीं रोका जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार रैणी गांव के समाजसेवी संग्राम सिंह व अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि रैणी गांव के तपोवन और विष्णुगाड में बन रहे हाइड्रो पावर प्रोजेक्टों से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए इन्हें बंद करते हुए वन विभाग की ओर से दी गई अनुमति को निरस्त करते हुए रैणी गांव के लोगों को विस्थापित किया जाए और प्रभावितों को मुआवजा दिया जाए।
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