नैनीताल हाईकोर्ट ने विकासनगर (देहरादून) में वर्ष 2016 से 2021 के बीच बिल्डर की ओर से अवैध रूप से हजारों पेड़ काटने के मामले में प्रमुख वन संरक्षक (पीसीसीएफ) के शपथ पत्र पर नाराजगी जताई है। 10 दिन के भीतर फिर से शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख वन संरक्षक सुनवाई के दौरान कोर्ट में वर्चुअली पेश हुए। मामले की अगली सुनवाई चार जुलाई को होगी।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी राकेश तोमर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि विकासनगर में वर्ष 2016 से 2021 के बीच एक बिल्डर की ओर से अवैध रूप से हजारों पेड काट दिए गए हैं। याचिकाकर्ता ने इस प्रकरण पर शामिल दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने 13 जून को जारी आदेश में टिप्पणी की थी कि विकासनगर में बड़े स्तर पर पेड़ों के अवैध कटान के लिए सरकारी मशीनरी भी दोषी है।
कोर्ट ने कहा
कोर्ट ने पीसीसीएफ की ओर से शपथ पत्र को तथ्यों से परे बताते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्यवाही के नाम पर निचले रेंक के कार्मिक (एक रेंजर और दो फारेस्ट गार्ड) को दोषी माना गया है जबकि ये पेड़ 2016 से 2021 के बीच कटे हैं। उसमें किसी अधिकारी का नाम नहीं है।