नैनीताल। राजभवन में मौजूद धरोहरें स्कैन करते ही अपना इतिहास बता देंगी। यहां मौजूद सामान की सूची तैयार कर उनमें क्यूआर कोड लगाया गया है। इससे न केवल सामान की बल्कि इन्वेंटरी के प्रारंभ से लेकर निष्प्रयोज्य होने तक सभी सूचनाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
नैनीताल स्थित ऐतिहासिक राजभवन में 125 वर्षों से भी अधिक पुराने सामान रखे गए हैं। धरोहर के रूप में रखी वस्तुओं का लेखा-जोखा और प्रबंधन काफी मुश्किल कार्य है। ऐसे में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) की पहल पर नैनीताल के साथ ही देहरादून के राजभवन में मौजूद सामान की सूची तैयार कर उनमें क्यूआर कोड लगाया गया है।
राजभवन में इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के माध्यम से इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया गया है। इस क्यूआर कोड को स्कैन करने पर उस सामान या इन्वेंटरी की पूरी जानकारी हासिल की जा सकती है।
इस कोड को लगने के बाद मैनुअल स्टाॅक भरने की जरूरत नहीं है, गलती की भी आशंका न के बराबर है। वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विवि ने इस इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम को विकसित किया है। इसे लोक निर्माण विभाग ने लगाया है। संवाद
संग्रहालय में रखे हैं सुल्ताना डाकू के हथियार
नैनीताल के राजभवन में दुर्लभ और बेहद आकर्षक और एंटीक फर्नीचर के साथ ही सुल्ताना डाकू के हथियार, भाले, तलवार आदि और पुराने समय के बर्तन रखे गए हैं। इसके साथ ही यहां मौजूद मेज, कुर्सी, टेबल व अन्य सामान में क्यूआर कोड लगाए गए हैं।
वर्जन
राजभवन में कई ऐतिहासिक धरोहर हैं। इनकी सुरक्षा और पूरी जानकारी रखने के लिए बार कोड लगाए गए हैं। स्कैन करते ही इनका पूरा इतिहास सामने आ जाएगा। - मनोहर सिंह, अधीक्षण अभियंता, लोनिवि, नैनीताल