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खुदाई में मिला हाथी का मांस और एक हड्डी

Mon, 30 Oct 2017 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, रामनगर (नैनीताल)।
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खुदाई - फोटो : अमर उजाला
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हाथी तस्करी के आरोपी वन गुज्जर की निशानदेही पर वन महकमे की टीम ने आमपोखरा रेंज में जेसीबी से खुदाई की जहां हाथी का कई किलो मांस और एक हड्डी बरामद हुई है। वन अधिकारियों के मुताबिक यह तीन माह पुराना है। इसकी जांच की जा रही है। वन गुज्जर को जेल भेज दिया गया है। 
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तराई पश्चिमी वन प्रभाग की टीम ने मुखबिर की सूचना पर बृहस्पतिवार की देर रात आमपोखरा रेंज में गौशाला मालधन मार्ग से हाथी के दांतों का सौदा करने जा रहे वन गुज्जर मोहम्मद कासिम निवासी प्लाट संख्या 22 आमपोखरा को पकड़ा था।

पूछताछ में सामने आया था कि हाथी को मारकर जमीन में दफना दिया गया था। इस पर रविवार को तस्कर की निशानदेही पर एसडीओ कलाम सिंह बिष्ट के नेतृत्व में वन टीम ने आमपोखरा रेंज के नत्थावली इलाके के प्लांट नंबर 22 में जेसीबी से खुदाई कराई जहां हाथी को दफनाया गया था।
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खुदाई में हाथी का कई किलो मांस, एक हड्डी बरामद हुई है, जिसे वन अधिकारियों ने कब्जे में ले लिया है और जांच के लिए भेजा जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक हाथी का मांस तीन माह पुराना है। आशंका जताई जा रही है कि हाथी का शिकार करने में कई और भी शिकारी शामिल हो सकते हैं।

इसकी भी जांच पड़ताल की जा रही है। विभाग का दावा है कि जंगलात से वन गुज्जरों को हटाने के लिए जरूरी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस प्रकरण की पूरी रिपोर्ट आला अधिकारियों को दी जाएगी। इस दौरान रेंजर ललित आर्या, पशु चिकित्सा अधिकारी योगेश अग्रवाल, आनंद कुमार मठपाल, शैलेंद्र कुमार चौहान, हरि राम आदि मौजूद थे।

इतना बड़ा हाथी आखिर कहां गया 

तस्करी में पकड़े गए हाथी के दांत की लंबाई करीब सवा मीटर है जिससे साफ है कि हाथी वयस्क होगा। अब सवाल यह है कि यदि खुदाई में सिर्फ कुछ किलो ही मांस निकला है तो बाकी हाथी कहां गया। वहीं इस इलाके में गुज्जरों ने 10 एकड़ में फसल उगा दी और झोपड़ी से बिजली का तार भी मिला जो कहीं न कहीं बड़े झोल की ओर इशारा कर रहा है ।

हजम नहीं हो रही वन महकमे की कहानी

वन महकमा दावा कर रहा है कि गुज्जर मो. कासिम ने हाथी को मार कर दफना दिया। बाद में दांतों को तस्करी के लिए ले जा रहा था लेकिन दबोचा गया। अब यहीं से वन महकमे की कहानी में झोल आने शुरू हो गए हैं।

पहला सवाल यह है कि विशालकाय हाथी को जंगल में मारना, दफनाने के लिए कृषि भूमि में गड्ढा खोदना और फिर हाथी को दफनाना लगभग नामुमकिन सी है क्योंकि हाथी को मारना, गड्ढा खोदने और घसीटने में इस घटना का खुलासा हो जाता तीन माह का इंतजार नहीं करना पड़ता।

दूसरा आमतौर पर शिकार की वारदातों में वन्य जीवों को मारकर विशेषकर हाथी के दांत ले कर तस्कर फरार हो जाते है न कि दफनाते हैं। अगर वन महकमे की कहानी सच भी मान ली जाए तो यह साफ है कि एक घंटे, एक दिन में इतने बड़े हाथी को मारना, गड्ढा बनाना फिर दफनाना संभव नहीं है यानी की वन विभाग गश्त सही से नहीं कर रहा है, या कह सकते है कि ये साठगांठ का नतीजा है।

दूसरा सवाल अगर हाथी को दफनाया गया था तो खेती के लिए खुदाई करने पर मांस क्यों नहीं मिला, अगर गल गया था तो एक हड्डी क्यों मिली, हाथी की बाकी हड्डियां कहां गई।  वारदात की सच्चाई जो भी हो लेकिन वन महकमे की गश्त में लापरवाही का फायदा तस्कर उठा रहे हैं
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