भवाली/गरमपानी/रामगढ़ (नैनीताल)। बुधवार की शाम मूसलाधार बारिश ने कैंची और रामगढ़ क्षेत्र भारी तबाही मचाई। सड़क पर भारी मात्रा में मलबा-पत्थर आने से भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह से बंद हो गया। शिप्रा नदी के उफान में आने से कैंची मंदिर और सांई बाबा मंदिर में मलबा घुस गया। वाहन चालकों के जाम में फंसने के कारण पुलिस ने उन्हें लौटा दिया।
कैंची मंदिर में मलबा आने से समिति के हाथ पैर फूल गए। मूसलाधार बारिश ने एक पल के लिए सबकी सांसें रोक दीं। सड़क जाम होने से वाहनों की लंबी कतार भी लग गई। कैंची ग्राम प्रधान पंकज निगल्टिया ने बताया कि निगलाट में घरों के अंदर मलबा घुसने से लोगों और कैंची मंदिर के अंदर मलबा घुसने से काफी नुकसान हुआ है। साथ ही कैंची में सड़क बंद होने से वाहनों को वापस भेजा गया। कैंची धाम ट्रस्ट के प्रबंधक विनोद जोशी ने बताया कि मंदिर परिसर के प्रसाद ग्रहण किए जाने वाले स्थान पर भारी मलबा जमा हुआ है। मंदिर के सदस्य ज्ञानी बिष्ट ने बताया कि कैंची मंदिर के यज्ञशाला के पास भारी मात्रा में मलबा आया है। गनीमत रही कि किसी को कोई जनहानि नहीं हुई है। भवाली कोतवाल आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि पांच बजे मार्ग बंद होने की सूचना मिली तो अल्मोड़ा और भवाली के मध्य दो जेसीबी से मार्ग खोलने के लिए लगाई है। खबर लिखे जाने तक मार्ग बंद था।
कोविड कर्फ्यू के चलते बड़ा हादसा टला
बुधवार की शाम कैंची में भारी बारिश से जहां मंदिर और घरों के आसपास मलबा घुसने से लोगों में अफरातफरी मच गई, वहीं गनीमत यह रही की कोविड कर्फ्यू के चलते मार्ग पर वाहनों की अधिक आवाजाही नहीं हो पाई। इसके चलते बड़ा हादसा होने से टल गया।
वाहनों को क्वारब-नथुवाखान-रामगढ़ होते हुए भेजा
भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग के कैंची में बुधवार को भारी बारिश से सड़क पर मलबा आने से वाहनों की लंबी कतार लग गई जिस पर खैरना चौकी प्रभारी आशा बिष्ट ने पुलिस टीम के साथ अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, डीडीहाट की ओर से आने वाले वाहनों को क्वारब से बायां नथुवाखान-रामगढ़ होते हुए भवाली की ओर भेजा गया। इसके चलते यात्रियों को अतिरिक्त 25 किमी दूर का सफर तय करना पड़ा इससे लोग परेशान रहे।
तहसीलदार टीम के साथ मौके पर रहीं मुस्तैद
भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर पाडली से लेकर कैंची तक जगह-जगह आए मलबे के ढेर पर कई वाहनों के फंसने की सूचना पर पहुंचीं कौश्याकटौली तहसीलदार बरखा जलाल ने जेसीबी की मदद से मलबे में फंसे हुए वाहनों को सड़क किनारे कराया। इस दौरान पटवारी विजय नेगी, राजेंद्र नाथ गोस्वामी, एसडीआरएफ और खैरना पुलिस मुस्तैद रही।
एबुलेंस को वाया रामगढ़ होते हुए भेजा
एनएच में बुधवार की शाम अल्मोड़ा से हल्द्वानी की ओर आ रही एंबुलेंस भी मार्ग बंद होने से फंस गई। एंबुलेंस में एक मरीज और परिजन शामिल थे। परिजनों के परिचितों में शामिल हल्द्वानी निवासी गौरव शर्मा ने बताया कि कैंची के पास मलबा आने से उनके परिचित फंस गए जिन्हें काफी देर बाद क्वारब-नथुवाखान-रामगढ़ मोटर मार्ग होते हुए हल्द्वानी की ओर आना पड़ा।
रामगढ़-नथुवाखान और मुक्तेश्वर मार्ग बंद
बुधवार दोपहर हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि से रामगढ़ के बोहराकोट-जमरानी क्षेत्र में सड़क पर भारी मात्रा में मलबा आ गया। इससे वाहनों की आवाजाही बंद हो गई। समाजसेवी पवन सिंह दरमवाल ने बताया कि जंगल की पहाड़ी से सड़क तक मलबा आ गया। साथ ही क्षेत्र के कुछ घरों में मलबा घुस गया। किसानों की फल-फसलें बर्बाद हो गई है। इधर भवाली के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या सुनीता जोशी ने बताया कि बारिश के पानी से मैदान तालाब में तब्दील हो गया। उन्होंने कहा कि कक्षाओं को नुकसान नहीं है लेकिन फर्नीचर और भोजन कक्ष को नुकसान पहुंचा है। रामगढ़ के कांग्रेसी नेता नवाब हुसैन ने बताया कि बारिश और ओलावृष्टि से रामगढ़-मुक्तेश्वर मार्ग पर मलबा आने से यातायात बंद है। साथ किसानों की फसलें और फल ओलावृष्टि से बर्बाद हो गए हैं। वहीं बेतालघाट ब्लॉक के हरतपा में बारिश से आडू, खुबानी, पूलम, नाशपाती को नुकसान हुआ है। प्रधान विमला रौतेला ने प्रशासन से किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। साथ सीम क्षेत्र में ओलावृष्टि से सब्जी को नुकसान पहुंचा है।
ककैंची में बादल फटने जैसी घटना नहीं हुई है बल्कि यह अतिवृष्टि है। ऐसा इसलिए क्योंकि कैंची के साथ साथ रामगढ़, मुक्तेश्वर, नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में भी तेज बारिश हुई है। किसी स्थान विशेष पर (निर्धारित परिधि के भीतर) यदि लगातार मूसलाधार बारिश हो और उससे उसी क्षेत्र में नुकसान हो तो उसे बादल फटना कहा जाता है।
-धीराज सिंह गर्ब्याल, डीएम