किच्छा। एकल सदस्यीय समर्पित आयोग ने बुधवार को सिरौलीकलां में ओबीसी आरक्षण पर सुनवाई की। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बीएस वर्मा की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सुझाव लिए गए। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि आरक्षण की कुल सीमा 50 फीसदी से अधिक नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि बीते चुनाव में आयोग के अभाव में ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में 80 फीसदी तक आरक्षण दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय के संवैधानिक प्रावधानों और दिशा-निर्देशों का पालन इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। न्यायमूर्ति वर्मा ने जोर दिया कि ओबीसी आरक्षण लागू करने से पहले ट्रिपल टेस्ट अनिवार्य है। राज्य सरकार ने इसी उद्देश्य के लिए इस समर्पित आयोग का गठन किया है। आयोग आंकड़ों के संकलन, विश्लेषण और परीक्षण के बाद अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगा।
न्यायमूर्ति ने कहा कि यह सार्वजनिक सुनवाई प्रक्रिया में पारदर्शिता, सहभागिता और समावेशिता सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। वहां शहरी विकास विभाग के अपर निदेशक विनोद कुमार सुमन, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, तहसीलदार गिरीश चंद त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी दीपक शुक्ला अलावा ताहिर मलिक, सईउदुलरहमान, नासिर अली समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।
ट्रिपल टेस्ट की अनिवार्यता
ट्रिपल टेस्ट के तहत पहले चरण में स्थानीय निकायों में ओबीसी समुदाय के सामाजिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का अध्ययन करना है। यह अध्ययन एक समर्पित आयोग की तरफ से किया जाएगा। दूसरे चरण में इस अध्ययन के आधार पर ओबीसी आरक्षण की सीमा और आवश्यकता का तार्किक निर्धारण किया जाएग। तीसरे और अंतिम चरण में यह सुनिश्चित करना है कि कुल आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से अधिक न हो।