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Bhimtal News: सर, बेरोजगारी में प्रधान बनता तो बंधता सेहरा, बजती शहनाई; जानिये ऐसा क्यों बोले युवा?

Wed, 18 Jun 2025 01:59 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, भीमताल

सार

बेरोजगार युवाओं का कहना है कि चुनाव लड़कर बीडीसी मेंबर, प्रधान या जिला पंचायत सदस्य बन जाते तो शादी का रास्ता खुल जाता। मगर इस बार भी सीट आरक्षित हो गई है, अब कैसे चुनाव लड़ें। 
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बेरोजगारी
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विस्तार
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सर, तमाम युवा बेरोजगार घूम रहे हैं, इसलिए शादी भी नहीं हो रही। चुनाव लड़कर बीडीसी मेंबर, प्रधान या जिला पंचायत सदस्य बन जाते तो शादी का रास्ता खुल जाता। मगर इस बार भी सीट आरक्षित हो गई है, अब कैसे चुनाव लड़ें। कम से कम युवाओं की बेरोजगारी देखते हुए उनके चुनाव लड़ने के लिए सीट अनारक्षित कर दीजिए। क्या पता चुनाव जीत जाएं तो शादी हो जाए...।

शादी के वास्ते सीट अनारक्षित करने की यह गुहार उन युवाओं की थी जो ग्राम पंचायत चुनाव में प्रधान, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत सदस्य चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। उनका ख्वाब था चुनाव जीतकर वरमाला पहनने का, मगर सीट आरक्षित हो गई। अब उन्होंने सीट अनारक्षित करने की गुहार लगाई है। आरक्षण सूची जारी होने के बाद मंगलवार को आपत्तियां सुनने का दिन था। मुख्य विकास अधिकारी अनामिका, एडीएम पीआर चौहान के सामने जब आपत्तियां आने लगीं तो ऐसे ही कुछ रोचक मामले भी सामने आए। जिले में आरक्षण पर 430 आपत्तियां दर्ज की गईं हैं।

यहां पहुंचे आपत्तिकर्ताओं ने प्रशासन पर मनमाने ढंग से प्रधान, जिपं सदस्य, बीडीसी मेंबर आरक्षण सूची जारी करने का आरोप किया। भीमताल, ओखलकांडा, रामनगर, हल्द्वानी, कोटाबाग, धारी, बेतालघाट और रामगढ़ से आए लोगों ने कहा कि इस बार भी दोबारा वही सीटें आरक्षित कर दी गई हैं, जो पिछले पंचायत चुनाव में आरक्षित थीं। अधिकांश सीटों पर महिलाओं को ही दोहराया गया है। ऐसे में पुरुषों को चुनाव लड़ने का हक नहीं मिल पा रहा है। कुछ आपत्ति दर्ज करने वालों ने कहा अगर पुरुष सीट पर युवा चुनाव लड़े तो शायद पांच साल रोजगार को देखते हुए उनकी शादियां हो जाएं। कहा कि महिलाएं अब शहरों में रह रही हैं। ऐसे में गांव में उनके चुनाव लड़ने से विकास प्रभावित होगा। उन्होंने फाइनल सूची जारी करने से पहले आरक्षण सूची में बदलाव करने की मांग की। सीडीओ और एडीएम ने आपत्तियों को सुनने के साथ निष्पक्ष तरीके से फाइनल आरक्षण जारी करने का आश्वासन दिया।

सोशल मीडिया में बनाया माहौल...अब क्या हो

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चुनाव लड़ने को लेकर तमाम युवाओं ने पूरी तैयारी की थी। सालभर पहले से ही वे अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे थे। फेसबुक से लेकर सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों में भी खुद की जोरदार पैरवी हो रही थी। स्थानीय कार्यक्रमों बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अपने स्तर से छोटे-मोटे कार्यक्रम भी करवाए। मगर आरक्षण की सूची जारी होते ही उनके सपनों पर कुठाराघात हो गया। ओखलकांड से जिला पंचायत की तैयारी कर रहे रवि गोस्वामी का कहना था कि ओबीसी को आरक्षण की बात पर सरकार मुकर रही है। युवाओं को मौका नहीं मिल रहा है। इसलिए उनकी अब तक की मेहनत बेकार हो रही है।

पंचायत चुनावों में युवाओं ने बेरोजगारी का हवाला देते हुए सीटें आरक्षित होने पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनकी आपत्तियों पर विचार कर निष्पक्ष तरीके से फाइनल सूची जारी की जाएगी। - अनामिका, मुख्य विकास अधिकारी।

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