नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में संचालित सरकारी व गैर सरकारी चाइल्ड केयर संस्थानों, बाल निकेतन केंद्रों में दिव्यांगजनों व असहाय बच्चों का उत्पीड़न होने व वहां पर उनकी देख रेख के लिए कोई उचित सुविधा नहीं होने के मामले में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की शिकायत का स्वतः संज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के पैरा लीगल कार्यकर्ताओं की ओर से कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट को याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि याचिकाकर्ता इसमें अपने सुझाव दे सकें। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
मामले के अनुसार गौलापार स्थित नैब केंद्र में दिव्यांग बच्ची के साथ हुए यौन उत्पीड़न व अन्य शिकायतों के आधार पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने मामले की जांच करके उसकी शिकायत उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश से की थी। जिसकी जांच में बाल निकेतनों, चाइल्ड केटर सेंटरों, दिव्यांग केंद्रों का संचालन तय मानकों के अनुसार ना होने का आरोप लगाया गया था। जनहित याचिका में दिव्यांग जनों की जरूरत के मुताबिक काउंसलर नियुक्त करने सहित केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करने की मांग की गई है।
पूर्व में हुई सुनवाई के बाद उच्च न्यायलय ने राज्य के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को निर्देश दिए थे कि वे अपने अधीन कार्यरत पैरा लीगल कार्यकर्ताओं से चाइल्ड केयर सेंटरों का दौरा कराएं और इन केंद्रों की रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट में पेश करें। सुनवाई के दौरान कुछ रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई।