नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में जलजनित बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए व्यापक स्तर पर निगरानी शुरू कर दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने स्थिति को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी बताते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को ज्योलीकोट में सक्रिय होकर सेवाएं देने के निर्देश दिए हैं।
ज्योलीकोट न्याय पंचायत के 12 गांवों में से आठ गांव प्रभावित बताए गए हैं। इनमें बेलवाखान, भल्यूटी, सड़ियाताल, छेड़ा, गंजा, चोपड़ा, कृष्णापुर और गेठिया शामिल हैं। वीरभट्टी क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाओं को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएमओ ने आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर एक्टिव केस सर्च करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक परिवार के सभी सदस्यों की स्वास्थ्य स्थिति का सर्वे किया जाएगा। किसी व्यक्ति में बुखार, उल्टी या दस्त के लक्षण मिलने पर उसे तत्काल चिकित्सकीय जांच के लिए नजदीकी पीएचसी, एसडीएच या जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा। गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 सेवा को भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा।
स्वास्थ्य टीमें घर-घर ओआरएस और जिंक वितरित करेंगी। साथ ही लोगों को पानी उबालकर पीने, सुरक्षित खाद्य पदार्थों का सेवन करने, हाथ धोने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने के प्रति जागरूक किया जाएगा।
एसीएमओ-एनएचएम, डीपीएम और जिला कम्युनिटी मोबिलाइजर को ब्लॉक आशा समन्वयक के सहयोग से आशाओं के दैनिक भ्रमण और स्वास्थ्य सर्वे का प्रारूप तैयार करने को कहा गया है। जरूरत के अनुसार आरकेएसके, काउंसलर, एनटीसीपी और मानसिक स्वास्थ्य टीम को भी क्षेत्र में लगाया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने दूषित पानी से होने वाले डायरिया, टाइफाइड, हैजा और पीलिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। सीएमओ ने संकट की स्थिति में सभी स्वास्थ्यकर्मियों से स्वयंसेवी भावना से ज्योलीकोट पहुंचकर सेवाएं देने को कहा है।