विधानसभा चुनाव के दिन 15 फरवरी को वोट डालने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी मतदान केंद्र के अंदर अकेले ही जाना होगा। उनके सुरक्षा कर्मी मतदान केंद्र के बाहर ही रहेंगे। मतदान केंद्र में केवल उन्हीं वीवीआईपी को सुरक्षा कर्मियों के साथ प्रवेश की अनुमति होगी जिन्हें जेड प्लस सुरक्षा प्रदान है।
लोकसेवकों के अलावा यहां तक की एसएसपी को भी मतदान केंद्र के अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रत्याशी भी अपने गनर मतदान केंद्र के बाहर ही छोड़कर वोट डालने जाएंगे।
भारत निर्वाचन आयोग ने मतदान को लेकर व्यापक दिशा निर्देश जारी किए हैं। निर्वाचन आयोग की गाइड लाइन के अनुसार मतदान केंद्र में केवल वोटर को जाने की ही अनुमति होगी।
आयोग द्वारा निर्वाचन ड्यूटी पर तैनात लोकसेवकों को मतदान केंद्र में प्रवेश करने की छूट दी गई है लेकिन लोकसेवकों में केंद्र या राज्य के मंत्री, उपमंत्री, पुलिस अधिकारी यानी कि एसएसपी भी वोट डालने के अतिरिक्त मतदान केंद्र के अंदर प्रवेश नहीं कर सकेंगे।
केवल जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त वीवीआईपी को अपने साथ सुरक्षा कर्मी अपने साथ अंदर ले जाने की छूट दी गई है, उनके साथ जो भी सुरक्षा कर्मी होंगे वे सादे कपड़ों में और अपना शस्त्र छिपाकर अंदर ले जाएंगे।
मुख्यमंत्री को भी अगर जेड प्लस सुरक्षा नहीं है तो वह भी अकेले की बिना सुरक्षा कर्मियों के मतदान केंद्र में वोट डालने जाएंगे। हल्द्वानी विधानसभा के आरओ केके मिश्रा ने बताया कि नेत्रहीन अथवा अशक्त व्यक्ति के साथ वोट डलवाने के लिए उसके परिवार का सदस्य मतदान केंद्र में अंदर जा सकेगा।
जबकि महिला वोटरों को अपने साथ गोद का बच्चा अंदर ले जाने की अनुमति दी गई है। साथ ही मीडिया कर्मियों को मतदान केंद्र के अंदर जाकर फोटो खींचने पर रोक रहेगी, निर्वाचन आयोग से प्राप्त पास के आधार पर मीडिया कर्मी केवल मतदान केंद्र पर वोटरों की लाइन तक जा सकेंगे।