सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था एक बार फिर से बिगड़ने लगी है। अल्मोड़ा से भाई को इलाज के लिए लेकर पहुंचे एक व्यक्ति को सुशीला तिवारी अस्पताल और बेस अस्पताल के घंटों चक्कर काटने पड़े। सिटी मजिस्ट्रेट के हस्तक्षेप के बाद मरीज को बेस अस्पताल में भर्ती किया गया।
अल्मोड़ा निवासी विनोद जोशी काफी दिनों से खांसी आ रही है और सांस लेने में तकलीफ हो रही है। भाई आनंद जोशी ने बताया कि उसके फेफड़ों में दिक्कत है। अल्मोड़ा के डाक्टरों ने भवाली सेनिटोरियम के लिए रेफर किया था। भवाली सेनिटोरियम में कहा गया कि हीमोग्लोबिन 7.6 प्रतिशत है और सुशीला तिवारी अस्पताल भेज दिया। आंनद ने बताया कि बृहस्पतिवार को सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंचे तो उन्होंने टीबी एवं श्वास रोग विभाग में जाने को कहा। टीबी एवं श्वास रोग विभाग से बेस अस्पताल ले जाने को कहा गया। बेस अस्पताल पहुंचने पर डाक्टरों ने टीबी एवं श्वास रोग विभाग ले जाने को कह दिया।
आनंद ने आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत गोनिया से मदद मांगी। गोनिया ने आनंद को सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह के पास भेजा। सिंह ने जिलाधिकारी दीपक रावत को पूरे मामले से अवगत कराया। डीएम के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट ने विनोद को बेस अस्पताल में भर्ती कराया। आनंद का आरोप था कि भर्ती करने के बाद भी कोई डाक्टर देखने नहीं आया।
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कोट
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। डाक्टर ने टीबी एवं श्वास रोग विभाग में जरूर देखा होगा। एमडीआर की जांच बेस में होती है इसलिए भेजा गया होगा।
डा. आरजी नौटियाल
विभागाध्यक्ष, टीबी एवं श्वास रोग विभाग
कोट
टीबी का अलग वार्ड होता है इसलिए भर्ती नहीं कर रहे होंगे। शुक्रवार को डाक्टर मरीज की जांच करेंगे। टीबी होने पर टीबी एवं श्वास रोग विभाग में भेजा जाएगा।
डा. एमएस बोहरा
कार्यवाहक सीएमएस, बेस अस्पताल