2013 को अपवाद मान लिया जाए तो कुमाऊं मंडल के अधिकतर जिलों में जून और जुलाई की बारिश ने पिछले छह साल के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस मानसून में अभी तक बागेश्वर में तो पूरे राज्य के अन्य जिलों की तुलना में अब तक सामान्य से अधिक सबसे अधिक बरसात हुई। ऊधमसिंह नगर में बारिश कम हो रही है पर 2014 केमुकाबले यहां भी जून-जुलाई में इस बार ज्यादा बारिश हुई। ऊधमसिंह नगर प्रदेश में एकमात्र ऐसा जिला है, जहां बारिश सामान्य से बेहद कम हो रही है। तराई के लिए यह चिंता की बात हो सकती है।
2013 में मानसून ने सारी सीमाएं तोड़ दी थी। उस समय करीब-करीब पूरे प्रदेश में ही जमकर बरसात हुई। इस असामान्य बारिश को छोड़ दिया जाए तो जून और जुलाई का यह महीना तराई के लिए वरदान साबित हुआ है तो कई समस्याओं से जूझ रहे पहाड़ के लिए आफत। हालांकि, खेती के लिए यह बारिश बेहतर ही साबित हो रही है। 2010 में सूखे के हालात का सामना करने वाले कुमाऊं के लिए अच्छी खबर यह है कि 2013 को छोड़कर पिछले छह सालों में यह सबसे बेहतर बारिश है।
पिछले छह साल की बारिश का रिकॉर्ड देखने पर यह साफ जाहिर हो रहा है कि कुमाऊं मंडल के जिलों में बारिश का ट्रेंड भी बदल रहा है। ऊधमसिंह नगर में 2010 में 755.5 मिमी और 2011 में 534.5 मिमी बारिश हुई थी। 2013 को छोड़कर इसके बाद कभी भी इन दो महीनों में ऊधमसिंह नगर में 420 मिमी से अधिक बारिश नहीं हुई। इस बार ऊधमसिंह नगर में 444 मिमी बारिश हो चुकी है।
इन दो महीनों में बागेश्वर पूरे प्रदेश में एक मात्र ऐसा जिला है जहां सामान्य से 78 प्रतिशत अधिक बरसात हुई है। पिथौरागढ़, नैनीताल, अल्मोड़ा में पिछले छह साल में 2013 को छोड़कर सबसे अधिक बरसात है। चंपावत में 2010 और 2011 में इस समय के मुकाबले अधिक बरसात हुई थी।