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शहर घूमने के बहाने हरीश रावत ने साधे कई निशाने

Sun, 04 Dec 2016 01:36 AM IST
राजीव शुक्ला
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शहर घूमने के बहाने हरीश रावत ने साधे कई निशाने - फोटो : अमर उजाला
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दमुवाढूंगा और बनभूलपुरा के आंदोलनों और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की नाराजगी से उपजी आंच की तपिश को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शनिवार को हल्द्वानी शहर का दौरा कर कम करने की कोशिश की।
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लगे हाथों, रावत ने वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश को भी जता दिया कि वे चुनाव में उनके लिए माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। हल्द्वानी कांग्रेस की कद्दावर नेता इंदिरा ह्दयेश का निर्वाचन क्षेत्र भी है। सदन में बतौर संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए ढाल भी बनती रही हैं।

इतना होने पर भी दमुवाढुंगा और बनभूलपुरा के आंदोलन इंदिरा हृदयेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ संबध को असहज किए हुए हैं। बनभूलपुरा संघर्ष समिति ने 2012 में वित्त मंत्री की ओर से किए गए चुनावी वायदों को न पूरा किए जाने को लेकर मोर्चा खोला हुआ है।
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यही हाल दमुआढुंगा में जमीन के मालिकाना हक को लेकर माहौल गरम है। दोनों ही इलाकों में मतदाता खासी संख्या में है। ऐसे में कांग्रेस असहज महसूस कर रही है। सूत्रों की मानें तो आलाकमान तक ये खबर भी पहुंचवाई गई कि पार्टी के बड़े नेता हल्द्वानी को लेकर संवेदनशील नहीं है।

बात यहीं तक सीमित नहीं रही। दमुवाढूंगा में मालिकाना हक देने की मांग के आंदोलन में पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी भी सक्रिय हो गए थे। तिवारी से लगातार भाजपा नेताओं की मुलाकात भी कई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे रही है।

चर्चा है कि रोहित भाजपा से प्रत्याशी हो सकते हैं। बात यहां तक पहुंच गई कि लालकुआं, भीमताल या हल्द्वानी से पार्टी उन्हें प्रत्याशी बना सकती है। पूर्व सीएम तिवारी का आज भी कुमाऊं में अपना कद है और उनके आह्वान से कांग्रेस को चुनाव में नुकसान हो सकता है।

रोहित को राज्य सरकार ने शुक्रवार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं उत्तराधिकारी कल्याण परिषद का गठन कर उपाध्यक्ष बनाया था। रोहित ने शनिवार को पद ठुकराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने चुनाव से पहले चुनावी अप्रैल फूल बनाया है।

शनिवार को मुख्यमंत्री रावत हल्द्वानी पहुंचे। उन्हें दो विवाह समारोह में भाग लेना था। रावत ने सर्किट हाउस जाने की बजाए बाजार घूमना ही उचित समझा। रावत ने ओके होटल से लेकर अब्दुल्ला बिल्डिंग तक पैदल भ्रमण किया और लोगों से मुलाकात की। उन्होंने नोटबंदी के असर पर भी लोगों से बात की।
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