राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की मान्यता को लेकर तलवार लटक गई है। मेडिकल कॉलेज की ओर से भेजी गई अनुपालन की रिपोर्ट को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने मानने से इन्कार कर दिया है। तमाम आपत्तियां लगाते हुए दस दिनों के भीतर दोबारा अनुपालन की रिपोर्ट भेजने को कहा है।
कॉलेज के प्राचार्य ने भी स्वीकार किया कि फैकल्टी पूरी नहीं है और मान्यता मिलना मुश्किल है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम ने एमबीबीएस की मान्यता को लेकर अप्रैल-मई में सुशीला तिवारी अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान तमाम खामियां मिली थीं और फैकल्टी भी पूरी नहीं थी।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने आपत्तियां लगाते हुए अनुपालन रिपोर्ट भेजने को कहा था। प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने अनुपालन के बाद रिपोर्ट भेजी थी मगर एमसीआई ने रिपोर्ट को अमान्य कर दिया है। सूत्रों की मानें तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने अनुपालन रिपोर्ट को मानने से इन्कार कर दिया है साथ ही कई आपत्तियां लगाई हैं।
एमसीआई ने दस दिनों के भीतर दोबारा अनुपालन रिपोर्ट भेजने को कहा है। सूत्रों की मानें तो मेडिकल कॉलेजों में लगभग 40 प्रतिशत की कमी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. भैसोड़ा ने बताया कि फैकल्टी की कमी है और कई डॉक्टर हाल ही में छोड़ गए हैं।
एमसीआई के पत्र का जवाब भेज दिया गया है कि अनुपालन में कुछ समय लगेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि फैकल्टी की कमी के कारण मान्यता को लेकर संकट हो रहा है। प्राचार्य का कहना है कि 20 प्रतिशत फैकल्टी की कमी है। ऐसे में माना जा सकता है कि एमबीबीएस की मान्यता पर अब तलवार लटक रही है।