स्वच्छ भारत अभियान के तहत हल्द्वानी में जल्द ही सार्वजनिक जगहों पर मूविंग और ई टायलेट नजर आएंगे। ई टायलेट आटो सेंसर होगा। सिक्का डालने से टायलेट का गेट खुलेगा और इस्तेमाल होने पर सेंसर से फ्लैश चलेगा। नगर निगम ने मूविंग और ई टायलेट की डीपीआर पर काम शुरू कर दिया है।
शहर में शौचालय का निर्माण और उनकी साफ सफाई बड़ी चुनौती है। बाजार क्षेत्रों में सरकारी भूमि की उपलब्धता नहीं होने से पक्के शौचालय निर्माण संभव नहीं हैं। ऐसे में ई टायलेट सबसे कारगर विकल्प हो सकता है। स्टील बॉडी से बने ई शौचालय जगह कम घेरने के साथ ही पूरी तरह आटोमैटिक होगा।
मेयर डा. जोगेंद्र सिंह रौतेला के मुताबिक ई टायलेट की डीपीआर तैयार हो रही है। ई टायलेट सेंसर से संचालित होगी। सिक्का डालते ही उसका गेट खुलेगा। इस्तेमाल होते ही अपने आप पानी फ्लैश होगा। ई टायलेट को सार्वजनिक जगहों पर रखवाया जाएगा। मेयर के मुताबिक मूविंग टायलेट भी उनके प्रोजेक्ट में शामिल हैं। मूविंग टायलेट साप्ताहिक बाजारों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए कारगर हैं। इन्हें जरूरत के हिसाब से कहीं भी खड़ा किया जा सकता है।
नाम हाईटेक, नहीं होती सफाई
हल्द्वानी। शहर में कई हाईटेक शौचालय बने हैं। शौचालय नगर निगम और विधायक निधि से बने हैं। इनका संचालन निजी हाथों में है। संस्थाएं ही इनकी देखरेख करती हैं। शौचालय का इस्तेमाल करने पर एक व्यक्ति से दस रुपये वसूला जाता है। लेकिन इनकी नियमित सफाई नहीं होती है। पॉट गंदा होने के साथ पानी के नलों की टोंटी खराब रहती है। हाथ धोने के लिए साबुन तक नहीं मिलता है। रात में बिजली गुल होने पर मोमबत्ती से काम चलाया जाता है। शौचालय सिर्फ नाम के हाइटेक हैं।
इस्तेमाल करने लायक नहीं बाजार के शौचालय
हल्द्वानी। बाजार क्षेत्रों में जहां भी सार्वजनिक पुरुष शौचालय बने भी हैं उनकी हालत खराब है। अधिकांश शौचालयों में यूरिन पॉट तक नहीं है। शौचालयों में पानी की सप्लाई नहीं होने से इतनी दुर्गंध आती है उनका इस्तेमाल तो दूर आसपास से गुजरने में भी नाक बंद करनी पड़ती है। बाजार क्षेत्रों में दशकों पुराने पुरुष शौचालय बने हैं। बर्तन बाजार, रुई बाजार, मीरा मार्ग, पटेल चौक के शौचालय इस्तेमाल करने लायक हीं नहीं हैं। शौचालयों की साफ सफाई नहीं होती है। यूरिन पॉट टूटकर गायब हो चुके हैं। गंदगी से खड़ा होना तक मुश्किल होता है।
तहसील और निगम दफ्तर का शौचालय बदबूदार
हल्द्वानी। शहर की सफाई करवाने वाला नगर निगम अपने ही कार्यालय के शौचालय की सफाई नहीं कर पाता है। नगर निगम के तीन मंजिला भवन में हर मंजिल में महिला और पुरुष शौचालय बने हैं। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती है। इनमें पानी तक नहीं है। थूकने से दीवारें लाल हैं। तहसील के शौचालय की भी दुर्गति है। यहां भी नाक बंद करके खड़ा होना पड़ता है।