मौत कब और कहां आ जाए यह तो कोई नहीं जानता, लेकिन उसी मौत से कोई जिंदगी छीन ले आए तो यह अचंभा ही होगा। कुछ ऐसा बुधवार सुबह फायर स्टेशन के समीप नहर में हादसे के बाद दिखा। पानी के तेज बहाव में फंसी कार में बंद लोगों को बचाने के प्रयास में नहर में कूदे दमकल कर्मी राजकुंवर सिंह राणा ने मौत को पटखनी दे दी।
कार का दरवाजा खोलकर दो जिंदगियों को सांसें देने के बाद खुद बहे राणा ने समझदारी से अपने को बचाया। नहर के कवर हिस्से में अंधेरे में फंसे राणा ने बहते आए नवजात के ताऊ रमेश को भी थाम लिया। खुद के साथ उन्हें भी मौत के मुंह से खींचकर एक नई सुबह दिखाई।
हादसे का पता चलते ही फायर स्टेशन पर तैनात लीडिंग फायर मैन राजकुंवर सिंह राणा भी पहुंच गए। वह लोगों को बचाने में लग गए। कार के ऊपर चढ़कर किसी तरह से उन्होंने फंसे दरवाजे को खोल दिया। वहां मौजूद एफएसओ मिन्दर पाल सिंह, फायर कर्मी अनुज शर्मा, जगदीप सिंह, कश्मीर सिंह, सूरज सिंह, अवनीश कुमार, जगत दानू, मोहम्मद अशरफ कार के अंदर से लोगों को निकालने में लग गए। तभी राजकुंवर का पैर फिसला और वह बह गए।
नहर आगे कवर्ड है और ऊपर सड़क बनी हुई है। नहर का पानी घटनास्थल से सौ मीटर आगे गहरे गड्ढे में गिरता है। इस गड्ढे में बचने की कोई संभावना नहीं बचती है। ऐसे में सूझबूझ का परिचय देकर राजकुंवर ने बहाव में खुद को रोका, उन्हें 50 मीटर पहले ही रोशनी में जिंदगी की आस दिखी। किसी तरह दीवार के सहारे चलकर रोशनी वाली जगह पर पहुंचे। यहां ऊपर मैनहोल का लोहे का ढक्कन था। वह पत्थर के सहारे खड़े हो गए। किसी तरह ढक्कन के नीचे के हिस्से को पकड़ लिया। कुछ क्षणों के बाद ही रमेश भी बहते हुए आ गए, वह चिल्ला रहे थे। राजकुंवर ने उन्हें अपने पास रोका और उसे हिम्मत बंधाना शुरू किया।
राजकुंवर ने बताया कि उन्होंने पन्नी में लपेटकर मोबाइल फोन जेब में रखा हुआ था। रमेश की मदद से किसी तरह फोन निकाला और फायर स्टेशन फोन कर मदद मांगी। तब अन्य दमकल कर्मी वहां पहुंचे। पता लगाने-लगाने में काफी समय लग गया। वहीं ऊपर जो हो रहा था वह तो राजकुंवर को नहीं मालूम था, लेकिन 35 मिनट बाद मैनहोल के ढक्कन को मशीन से उखाड़ने की आवाज आई, फिर नीचे तक रोशनी फैल गई। इसी रोशनी में जिंदगी का उजाला नजर आ गया। इसके बाद राजकुंवर को बाहर निकाला गया, उन्होंने रमेश को भी रस्सी के सहारे ऊपर भेजकर खुद व उनकी भी जान बचाई।
राजकुंवर बोले- 80 बार रेस्क्यू ऑपरेशन किए, मौत से सामना इस बार ही हुआ