नगर निगम बोर्ड मीटिंग में स्वकर प्रणाली को लेकर जमकर घमासान हुआ है। नगर निगम के अफसर प्रणाली को जन और नगर निगम दोनों के हित में बता रहे थे, तो दूसरी तरफ कई सभासदों को आशंका थी कि इससे अचानक लोगों पर कर का बोझ बढ़ जाएगा।
तर्क, बहस और तकरार के बाद आखिरकार तय हुआ कि करों के संबंध में एक कमेटी एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी, उसके बाद फैसला किया जाएगा। वहीं, पार्कों पर कब्जे को लेकर जवाब नहीं मिलने पर पार्षद राजेंद्र सिंह बिष्ट ने बहिष्कार कर दिया।
नगर निगम बोर्ड मीटिंग में सात एजेंडे थे, लेकिन इसमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा नगर निगम सीमा में आने वाले क्षेत्र में करों के लिए स्वकर प्रणाली को लागू करना था। यह एजेंडा जैसे ही बोर्ड मीटिंग में आया कई सभासदों ने उसके प्रभावों और शंकाओं को लेकर सवाल उठा दिया।
धीरेंद्र रावत का कहना था कि यह प्रणाली व्यावहारिक नहीं है। शाहजहां बेगम का कहना था कि पहले सुविधाओं की बढ़ोत्तरी की जाए, फिर इस पर फैसला हो। गुुफरान का कहना था कि पहले सीवर जैसी सुविधा लोगों को प्रदान की जाए, फिर टैक्स बढ़ाने या बदलाव के संबंध में कोई बात हो।
लईक कुरैशी का कहना था कि पुराने चुंगी भवन समेत निगम की संपत्ति पर जो कब्जा है, उस पर अधिकारी जवाब दें। नरेंद्र जीत सिंह रोडू का कहना था कि शासन और प्रबंधन ने इसे लागू करने का फैसला कर लिया है। अगर यह लागू हो गया तो कोई भी छूट आदि की संभावना नहीं बनेगी।
सीएम पांडे ने भी इसके समर्थन में बात कही। मुख्य नगर आयुक्त हरबीर सिंह ने कहा कि अगर फैसला नहीं होता है, तो प्रबंधन इसे लागू कर देगा। शासन का रवैया इस मामले में बेहद कड़ा है। बाद में पांच सदस्यीय कमेटी बनाकर क्षेत्रवार करों के संबंधों में समीक्षा करने की बात पर सहमति बनी। महेंद्र नागर, मनोज गुप्ता ने भी विचार रखे।
बोर्ड मीटिंग में दूसरा एजेंडा लाइसेंस उपविधि के अनुमोदन पर विचार के लिए आया। इसमें निगम ने 98 ऐसे व्यवसाय और कार्य चिह्नित किये हैं, जिनसे शुल्क लिया जाएगा। इसमें मोबाइल टावर, प्रापर्टी डीलिंग का काम करना, बैंक्वेट हाल, सिनेमाघर, नर्सिंग होम, जनरल स्टोर, बार, शराब की दुकान, डायगनोस्टिक सेंटर आदि को कवर किया गया है।
इसमें बार बियर, अंग्रेजी शराब की दुकान, डायगनोस्टिक सेंटर आदि के रेट को लेकर पाषर्दों ने संशोधन की बात कही। मेयर डा. जोगेंद्र सिंह रौतेला के कहने पर इसे स्वीकार कर लिया गया। मेयर का कहना था कि अभी इसको विचार के लिए रखा गया है, बाद में इस पर आपत्ति मांगी जाएगी।
फिर इसका नोटिफिकेशन जारी होगा। अगर कोई और आपत्ति है, तो उसमें दे सकते हैं। वेंडर कमेटी की पहली मीटिंग भी हुई। इसमें सर्वे में जितने फड़, ठेले की संख्या का आंकड़ा आया है, उससे कई लोगों ने सहमति नहीं व्यक्त की है।
प्रस्ताव संख्या चार में नगर निगम हल्द्वानी में रैबिज वैक्सीनेशन प्रस्ताव पर विचार स्वीकार किया गया। यह प्रोग्राम चलेगा। पांचवें प्रस्ताव में स्लाटर हाउस की डीपीआर तैयार करवाने पर सहमति बनी। पर तय हुआ कि भैंसा एवं बकरा स्लॉटर हाउस अलग-अलग बनेंगे।
प्रस्ताव संख्या छह में स्वच्छता समितियों के गठन व वित्तीय अनुमोदन पर विचार किया गया। फैसला हुआ कि 55 स्वच्छता समितियों का गठन होगा जिसमें 2.47 लाख रुपये प्रतिमाह व्यय होगा। प्रस्ताव संख्या सात में शासन द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्राप्त सामुदायिक शौचालयों को बनाने पर भी सहमति बनी।
इस मद में 19 लाख रुपये स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्राप्त हो चुका है। इसमें बालक, बालिका कालेज के अलावा एक अन्य स्कूल में निर्माण किया जाएगा।