हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज के पुस्तकालय से पुस्तकें लेने के बाद जमा न करने वाले प्राध्यापकों और कर्मचारियों को अब कार्रवाई से बचने के लिए पुस्तकों की कीमत अदा करनी पड़ रही है। नोटिस मिलने के बाद तीन प्राध्यापकों ने 10 हजार रुपये कॉलेज में जमा किए हैं। कुछ कर्मचारी को पुस्तकों के एवज में 6169 रुपये जमा करने पड़े हैं।
एमबीपीजी कॉलेज में पुस्तकालय से 15 से 20 वर्ष पूर्व पुस्तकें लेने वाले कर्मचारियों और प्राध्यापकों की सूची बनाई गई है। उनसे पुस्तकें वापस मंगाने की प्रक्रिया चल रही है। कॉलेज प्रशासन की ओर से पत्र मिलने के बाद काफी लोगों ने पुस्तकें न मिलने पर धनराशि जमा कर दी थी जो कि पौने दो लाख रुपये से अधिक है। इधर, 13 प्राध्यापकों और कर्मचारियों ने पत्र मिलने के बाद भी पुस्तकें वापस करने की कोई सुध नहीं ली तो कॉलेज की ओर से पिछले दिनों उन्हें नोटिस भेजे गए। नोटिस मिलने के बाद तीन प्राध्यापकों ने 10 हजार रुपये पुस्तकों की कीमत के रूप में जमा कर दिए हैं। लेकिन नौ कर्मचारी और प्राध्यापक अभी भी ऐसे हैं जिन्होंने पुस्तकें जमा नहीं की हैं। अब कॉलेज प्रशासन इनसे वसूली करने की तैयारी कर रहा है।
एमबीपीजी कॉलेज के सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष दान सिंह मेहरा का कहना है कि प्राध्यापकों और कर्मचारियों को पुस्तकें वापस करने के लिए पत्र भेजा गया था। अभी भी नौ लोग ऐसे हैं जिनके ऊपर 65 हजार रुपये कीमत की पुस्तकें बकाया हैं। इन प्राध्यापकों और कर्मियों ने एक सप्ताह के भीतर पुस्तकें या फिर उसकी राशि जमा नहीं की तो कोषागार और तहसील प्रशासन को वसूली के लिए लिखा जाएगा।
कुछ छात्र-छात्राओं ने जमा की किताबें
हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज में पुस्तकालय में पांच वर्ष पहले विद्यार्थियों को पुस्तकें जारी किए जाने पर उनसे जमानत राशि जमा कराई जाती थी। ऐसे कई विद्यार्थी थे जो पुस्तकें लौटाकर अपनी जमानत राशि वापस नहीं ले गए थे। कॉलेज प्रशासन ने इन विद्यार्थियों को 28 फरवरी तक समय दिया था। कॉलेज के मुताबिक छात्र-छात्राएं पुस्तकें जमा कर 20 हजार रुपये वापस ले गए हैं।