रामलीला मंचन के दौरान कलाकारों को तैयार करने, उनके वस्त्र, आभूषण और रामलीला में प्रयुक्त किए जाने वाले साधनों की ओर लोगों का ध्यान कम ही जाता है। लेकिन, मंचन की तैयारियों को लेकर रामलीला से जुड़े लोग दो महीने पहले से ही तैयारियां शुरू कर देते हैं।
कलाकारों के वस्त्र, आभूषण समेत लीला मंचन के दौरान जरूरत की सामग्री समेत तालीम देकर तैयार करने तक की जिम्मेदारी संभालने वाले लोग पर्दे के पीछे ही रहते हैं। इनमें मुख्य किरदार जो निभाते हैं वह हैं ग्रीन रूम की देखरेख करने वाले रामलीला से जुड़े लोग।
कलाकारों को तैयार करने से लेकर उनके मंच पर अदाकारी करने तक इन पर्दे के पीछे के लोगों की कहानी भी कम रोचक नहीं है। रामलीला के ग्रीन रूम को वर्षों से संचालित कर रहे मनोज वर्मा, शुभम बहुगुणा, आकाश राठौर, संजय सिंह रावत, कुनाल पांडे, धमेंद्र जोशी, नीरज रावत और जितेंद्र जंतवाल बताते हैं कि जन्माष्टमी के तुरंत बाद रामलीला की सामग्री का हिसाब-किताब बनाना शुरू हो जाता है।
जरूरी सामग्रियों के लिए कमेटी से प्रस्ताव पास कराकर खरीदारी शुरू हो जाती है। करीब एक माह पूर्व कलाकारों के कपड़े धुलवाकर संभाल लिए जाते हैं। स्थानीय स्तर पर सामग्री उपलब्ध नहीं होने पर स्वयं ग्रीन रूम की टीम के लोग मथुरा जाकर सामग्री खरीदकर लाते हैं। हर वर्ष करीब 50-60 हजार के सामान की खरीदारी करनी पड़ती है।
इसके बाद जब रामलीला शुरू हो जाती है, उस समय से लेकर मंचन के आखिरी दिन तक ग्रीन रूम के सदस्यों का काम काफी बढ़ जाता है। मंच में आरती, फूल, माला, जिस दृश्य का मंचन हो रहा हो, उसी के अनुरूप सहायक सामग्री को समय पर उपलब्ध कराना ग्रीन रूम संचालकों की ही जिम्मेदारी होती है। सबसे खास पहलू यह है कि आस्था भाव से जुड़े यह लोग नि:स्वार्थ भाव से इस काम को करते हैं।