इंसान तो छोड़ो अब मुर्दों को भी सुकून नहीं है। कब्रिस्तान में मुर्दों की आत्मा जुआरियों और नशेड़ियों से परेशान है। कब्रिस्तान में सुबह से ही जगह-जगह जुआरियों के फड़ सज जाते हैं। नशेड़ी भी अपनी संगत ढूंढकर दिनभर नशे की हालत में इधर-उधर पड़े रहते हैं। बाकी कसर आवारा कुत्तों और धोबीघाट ने पूरी कर दी है। धोबीघाट के कपड़े कब्रिस्तान में सूखते हैं। इससे वहां गंदगी हो रही है। आवारा कुत्तों ने कब्र खोद डाली हैं।
हल्द्वानी में कब्रिस्तान कई हेक्टेयर भूमि में फैला है। कब्रिस्तान के अंदर जाने के लिए बरेली रोड मेडिकल कालेज के गेट के सामने और नई बस्ती में गेट बने हैं। बाकी चारों तरफ चहारदीवारी है, जो जर्जर हाल में है। चहारदीवार टूटी होने से उजाला नगर और इंद्रानगर से लोग कब्रिस्तान में घुसते हैं। कब्रिस्तान में सुबह से जुए के फड़ सज जाते हैं। यहां हर स्तर का जुआ होता है। दिन ढलने तक जुआरियों के फड़ लगे रहते हैं। जुआरियों की महफिल में ही नाश्ता-पानी पहुंचता है और वहीं गंदगी फैलाते हैं।
कब्रिस्तान नशेड़ियों का अड्डा भी है। यहां शराब से लेकर सूंघने और चरस का नशा होता है। झाड़ियों में जगह-जगह इंजेक्शन सीरीज और नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं के खाली रैपर पड़े दिखते हैं। झाड़ियों की आड़ में किशोर भी नशा करके दिन भर मस्त रहते हैं। कब्रिस्तान की चहारदीवारी टूटी होने से बिज्जू और आवारा कुत्ते भी मंडराते रहते हैं, जिन्होंने कई कब्र खोद डाली हैं