कुमाऊं विश्वविद्यालय में अब स्नातक स्तर पर उत्तराखंड का इतिहास भी पढ़ाया जाएगा। इसके लिए बाकायदा पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है और विषय को पढ़ाने के लिए आठ शिक्षकों के पद सृजित किए गए हैं। बता दें कुविवि नैनीताल के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष और संयोजक प्रो.गिरधर सिंह नेगी पाठ्यक्रम के मुद्दे को लेकर लंबे समय से प्रयासरत थे। उनकी मुहिम अब रंग लाई।
डीएसबी परिसर में सोमवार को कुलपति प्रो.होशियार सिंह धामी के दिशा-निर्देश पर विषय विशेषज्ञों की मौजूदगी में उत्तराखंड का इतिहास पाठ्यक्रम समिति की बैठक हुई। बैठक में उत्तराखंड का इतिहास स्नातक स्तर से ही शुरू करने और इसके लिए बनाए गए पाठ्यक्रम को स्वीकृति दे दी गई।
पाठ्यक्रम को पढ़ाने के लिए एक प्रोफेसर, 2 एसोसिएट प्रोफेसर, 4 असिसटेंट प्रोफेसर के पद सृजित किए गए। तय किया गया कि पीजी स्तर पर एक विशिष्ट शाखा के रूप में उत्तराखंड का इतिहास पाठ्यक्रम शामिल होगा। समिति ने प्रसिद्ध इतिहासकार और पद्मश्री प्रो.शेखर पाठक व प्रो.अजय सिंह रावत के सम्मान में व्याख्यानमाला आयोजित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।
बैठक में समिति ने छात्रों और शोध छात्रों के लिए ग्रीष्मकालीन शैक्षणिक भ्रमण पर्वतीय क्षेत्रों में तथा शीतकालीन भ्रमण मैदानी क्षेत्रों में आयोजित करने के लिए दो लाख रुपये का अनुदान प्रदान करने की संस्तुति प्रदान की। इसके अलावा इतिहास विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डा.हीरा सिंह भाकुनी के शोध निर्देशन में छात्रों की संख्या 8 करने तथा सेवानिवृत्ति के बाद पांच साल का सेवा विस्तार (अन्य प्राध्यापकों की तरह) किये जाने की संस्तुति की गई।
सहायक क्यूरेटर और वर्गीकरण सहायक को शोध कराने व शोध छात्र प्रदान करने की अनुमति को भी समिति ने मंजूरी दी। इसके अलावा हिमालय संग्रहालय के संरक्षण व संवर्धन, संग्रहालय में प्रदर्शित सामग्री के वृत्तचित्र बनाने के लिए पांच लाख रुपये की संस्तुति दी गई। इसके साथ ही जनजातीय अध्ययन केंद्र की स्थापना के मुद्दे को लेकर भी चर्चा की गई।
इतिहास विभाग के संयोजक प्रो.गिरधर सिंह नेगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में विषय विशेषज्ञ के रूप में चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो.केके शर्मा, एमजेपी रूहेलखंड के प्राचार्य प्रो.अभय प्रताप सिंह, एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि के प्रो.संतन सिंह नेगी, बाजपुर के डा.एके जोशी, हल्द्वानी के डा.सेराज मोहम्मद व डा.नीरज रूबाली, दोषापानी के डा.संतोष कुमार, रूद्रपुर के डा.एमएस मनोला, डा.संजय घिल्डियाल, डा.सावित्री कैड़ा जंतवाल, डा.हीरा भाकुनी, डा.रितेश साह, डा.भुवन शर्मा, डा.पूरन अधिकारी, डा.भुवन आर्य, डा.निर्मल बसेड़ा, खुशवंत सिंह व शिवराज आदि मौजूद थे।