हल्द्वानी। 15 साल पुराने सरकारी वाहन चलन से बाहर कर दिए गए हैं। सरकारी महकमों में सरकारी वाहनों की कमी है। यह देखते हुए कुछ सरकारी अधिकारी उन वाहनों को सफेद नंबर प्लेट पर चला रहे हैं। हालांकि नियम के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता है। आरटीओ विभाग ऐसे वाहनों का चालान कर रहा है।
यह तो शुरू से ही माना जा रहा था कि पुराने सरकारी वाहनों के चलन से बाहर होने के बाद सरकारी महकमों के पास वाहनों की कमी हो जाएगी लेकिन आरटीओ प्रवर्तन इस मामले में कोई भी रियायत देने के मूड में नहीं है जिस वजह से नियमों की अवहेलना करके इस्तेमाल किए जा रहे सरकारी वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है और सरकारी विभाग में खलबली मची हुई है।
वाहनों की कमी बनी वजह
हल्द्वानी। एक अप्रैल से नैनीताल जिले में 303 सरकारी वाहन चलन से बाहर हो गए हैं। उस समय कहा गया था कि इन वाहनों को स्क्रैपिंग यार्ड में दिया जाना था लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हो पाया। इधर, सरकारी महकमों में वाहनों की कमी हो गई। कुछ दिन तक सरकारी वाहनों को खड़ा किया गया लेकिन जब नये वाहन उपलब्ध होने में ज्यादातर विभागों को दिक्कत आई तब इन खड़े वाहनों को ही कुछ महकमों ने इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
ऐसे कर रहे हैं इस्तेमाल
हल्द्वानी। सरकारी महकमे चलन से बाहर हुए वाहनों पर अब सफेद नंबर प्लेट लगा रहे हैं। ज्यादातर मामलों में सरकारी वाहनों की जांच कम ही होती है। लेकिन जब इसकी सूचना बार-बार आरटीओ प्रवर्तन के पास आई तो कार्रवाई भी शुरू कर दी गई। ऐसे भी मामले आरटीओ तक पहुंचे हैं जिनमें इन वाहनों में हूटर भी लगाया जा रहा था और साथ ही विभाग की नाम प्लेट भी लगीं थीं।
ये हैं विकल्प
हल्द्वानी। सरकारी विभागों के पास अगर वाहनों की कमी है तो सरकार की ओर से आदेश है कि वाहनों को किराये पर लिया जा सकता है और साथ ही सरकारी अधिकारी भी अपने निजी वाहनों को सरकारी काम में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके एवज में अधिकारी को रुपये दिए जाए सकते हैं। बताया जा रहा है कि ज्यादातर अधिकारी अपने निजी वाहन को सरकारी कामों में देने से परहेज करते हैं।
कोट == 15 साल पुराने सरकारी वाहन को किसी भी तरह से इस्तेमाल में नहीं लिया जा सकता है। साथ ही सरकारी वाहनों का इस्तेमाल भी नियमों के तहत किया जाएगा जो भी मामले सामने आ रहे हैं, कार्रवाई की जा रही है।
-नंद किशोर, आरटीओ प्रवर्तन, संभागीय कार्यालय, हल्द्वानी।