रामनगर (नैनीताल)। पीपीपी मोड पर जाने के बाद भी रामनगर के सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। मरीजों को लगातार रेफर करने से अस्पताल रेफरल सेंटर बनके रह गया है।
इस साल जून में सरकारी अस्पताल को पीपीपी मोड पर दे दिया गया और अब प्राइवेट कंपनी अस्पताल का संचालन कर रही है। स्थानीय युवक मनोज पांडेय ने बताया कि अस्पताल में फिजिशियन तक तैनात नहीं है। पेट दर्द, फ्रैक्चर, एक्सीडेंट के मरीजों को रेफर किया जा रहा है। चिकित्साधीक्षक डॉ. मणि भूषण पंत ने बताया कि मरीजों को रेफर करना ठीक नहीं है। मामले में संबंधित कंपनी से बातचीत कर कार्रवाई की जाएगी।
विधायक दीवान सिंह सिंह बिष्ट ने कहा कि बेहतर सुविधा जनता को मिले, इसके लिए अस्पताल को पीपीपी मोड पर दिया गया है। हायर सेंटर रेफर करना समस्या का हल नहीं है। अस्पताल प्रबंधन से वार्ता करूंगा।
ज्येष्ठ प्रमुख संजय नेगी ने कहा कि अस्पताल में इस समय अनट्रेंड डॉक्टर, नर्स और स्टाफ है, जिन्हें इंजेक्शन लगाने तक नहीं आ रहे हैं। मैंने पहले भी अस्पताल के पीपीपी मोड पर जाने का विरोध किया था। ऐसे में इस अस्पताल को पीपीपी मोड से हटा देना चाहिए।
व्यवसायी अशोक गुप्ता ने कहा कि लगातार मरीजों को रेफर किया जा रहा है, इससे अच्छा तो पहले ही अस्पताल ठीक था। तब अस्पताल में कुछ इलाज तो होता था। अस्पताल का स्टाफ भी मरीजों के साथ सही व्यवहार नहीं कर रहा है। रोजाना मरीज इसकी शिकायत कर रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता हरीश चंद्र सती ने कहा पीपीपी मोड पर जाने से पहले अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी रहती थी, लेकिन अब मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है। अस्पताल के अप्रशिक्षित डॉक्टरों और स्टाफ की वजह से मरीज वहां जाने से बच रहे हैं।