फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शासन का दावा, गढ़वाल में हुई धान की खरीद

Sun, 22 Oct 2017 12:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
विज्ञापन
मड़िहान में मिल में रखा चावल।
विज्ञापन
हल्द्वानी। यह अब खुलकर सामने आ गया है कि कुमाऊं की तरह गढ़वाल में भी धान की खरीद कागजों में हुई। हैरान करने वाली बात यह है कि शासन को गढ़वाल मंडल में हुई खरीद के कागजों पर ही विश्वास है। खाद्य सचिव की ओर से बयान जारी कर मंडी परिषद की ओर से दिखाई गई खरीद को आधार बनाकर धान की खरीद होने का दावा किया गया है। इसके उलट, गढ़वाल की मंडी समितियां सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत धान की न के बराबर आवक होने और न के बराबर खरीद होने की जानकारी दे रही हैं।
विज्ञापन


खाद्य सचिव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके गढ़वाल मंडल में धान खरीद का दावा किया है और कहा है कि कच्चा आढ़तियों ने 49743.64 मीट्रिक टन और सरकारी क्रय एजेंसियों ने 711.18 मीट्रिक टन धान खरीदा है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद खाद्य सचिव की ओर से एक विज्ञप्ति जारी की गई है। इसमें मंडी परिषद की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था। विभाग की ओर से कहा गया था कि गढ़वाल की मंडियों में 31 जनवरी 2017 तक 62386.9 मीट्रिक टन धान की आवक हुई।

आखिर कौन बोल रहा है झूठ
मंडी समिति ने अमर उजाला को जो सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना दी है उसमें मंगलौर मंडी ने कहा है कि नवीन मंडी स्थल में धान की आवक नहीं होती है न ही नवीन मंडी स्थल के अंदर कोई लाइसेंस धारी धान का कारोबार करता है। लक्सर मंडी ने कहा है कि मंडी का अपना यार्ड नहीं है। अत: सूचना शून्य है। हरिद्वार यूनियन मंडी ने कहा है कि धान खरीद की नीलामी नहीं की गई है। मंडी परिषद ने जो इन मंडियों में खरीद दिखाई है, इसमें कहा गया है कि मंगलौर मंडी में 52506 क्विंटल, लक्सर में 23543 क्विंटल और हरिद्वार यूनियन ने 181612 क्विंटल धान 31जनवरी 2017 तक खरीदा गया है। ऐसे ही अन्य मंडियों ने भी सूचना दी है।
विज्ञापन


नियमों का नहीं हुआ पालन
एसआईटी की रिपोर्ट में भी साफ हुआ है कि ऊधमसिंह नगर में मंडियों में धान आया ही नहीं। सिर्फ कागजों में खरीद हुई। नियमों की बात करें तो खरीफ नीति 2016-17 में साफ लिखा है कि धान की नीलामी होगी और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। मंडी समितियों ने जो सूचना भेजी है उसमें अधिकतर मंडियों ने कहा है कि वीडियो रिकार्डिंग नहीं की गई। सवाल ये है कि जो धान मंडियों में आया, उसकी बोली और वीडियो रिकॉर्डिंग क्यों नहीं हुई।

इनके जवाब कौन देगा
-कुमाऊं मंडल में धान की खरीद कागजों में हुई, यहां भी मंडियों ने प्रवेश पर्ची काटी, उसके बाद 6आर और 9आर भी काटे गए, ठीक इसी तरह का मामला गढ़वाल में भी है, एसआइटी के दायरे में गढ़वाल की धान खरीद क्यों नहीं रखी गई ?
विज्ञापन

- सरकार क्यों गढ़वाल मंडल की जांच नहीं करा रही है ?
- मंडियों में धान की आवक हुई, नियमों में इसकी बोली और वीडियो रिकार्डिंग होनी थी तो इसकी वीडियो रिकार्डिंग कहां है ?
-मंडी समितियों में धान खरीद की वीडियो रिकार्डिंग की जांच क्यों नहीं हो रही है ?
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें