प्रदेश में राष्ट्रपति शासन के साथ नगर निगम कर्मियों में भी ‘अच्छे दिन’ की उम्मीद जगने लगी है। नगर निगम आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। रिटायर्ड कर्मियों का पेंशन और ग्रेच्युटी के बकाया देना तो दूर कर्मचारियों के वेतन और पीएफ जमा करने के लाले पड़ गए हैं। कर्मियों का बकाया हर महीने बढ़ रहा है। प्रदेश में सियासी उठापटक के बीच केंद्र की मोदी सरकार से चुनावी साल में उत्तराखंड के लिए विशेष पैकेज मिला तो फायदा कर्ज के बोझ तले दबी नगर निकायों को भी मिल सकता है।
नगर निगम स्वायत्त संस्था है। कर्मियों के वेतन के लिए राज्य सरकार से अनुदान मिलता है। जबकि आधारभूत बुनियादी सुविधाओं के लिए राज्य एवं केेंद्र सरकार से बजट मिलता है। निगम के आमदनी के अपने स्रोत हैं, लेकिन खर्चे इससे कई गुना अधिक हैं। आमदनी की तुलना में खर्च अधिक होने से नगर निगम हर महीने कर्ज के बोझ तले दब रहा है। निगम रिटायर्ड और सेवारत कर्मचारियों का ही सबसे बड़ा बकायेदार हो गया है।
राष्ट्रपति शासन लागू होने के साथ अब प्रदेश की पूरी व्यवस्थाएं केंद्र की अधीन चली गई है। 2017 में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में मोदी सरकार राष्ट्रपति शासन के दौरान उत्तराखंड को विशेष पैकेज देकर नौकरीपेशा कर्मियों के लिए अच्छे दिन ला सकती है। कर्मचारियों के लिए अब यही आखिरी उम्मीद बाकी है।
नगर निगम में कर्मियों की स्थिति
नगर निगम में 150 अधिकारियों और कर्मचारियों का स्टाफ है। 234 नियमित सफाई कर्मचारी हैं। जबकि 100 सफाई कर्मी संविदा और 67 कर्मचारी स्वच्छता समितियों के माध्यम से जुड़े हैं। 8 उपनल के कर्मी हैं। सभी कर्मियों और अधिकारियों का एक महीने का वेतन करीब डेढ़ करोड़ बनता है। प्रदेश सरकार से हर तीन महीने में दो करोड़ 79 लाख रुपये अनुदान मिलता है। इसी अनुदान से कर्मियों का वेतन जाता है। बकाया वेतन का भुगतान नगर निगम की निधि से होता है। इस लिहाज से कर्मचारियों को वेतन के लिए तीन महीने का इंतजार करना पड़ता है।
जमा नहीं हो रहा पीएफ
आर्थिक तंगी के चलते नियमित कर्मियों का सितंबर 2015 से पीएफ जमा नहीं हो रहा है। पीएफ का करीब 70 लाख रुपये का बकाया हो चुका है।
रिटायर्ड कर्मियों को नहीं मिल रही पेंशन और ग्रेच्युटी
नगर निगम से सेवानिवृत्त 65 कर्मचारी पेंशन और ग्रेच्युटी के लिए चप्पलें घिस रहे हैं। इनका करीब 20 करोड़ बकाया है। सालों से इनको आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला है।
फेरी लगाकर पाल रहे परिवार
रिटायर्ड होने के बाद सरकारी कर्मचारी परिवार के साथ आराम की जिंदगी बीताते हैं। लेकिन निगम के कर्मचारी परिवार का पेट पालने के लिए मजदूरी कर रहे हैं। कोई फेरी लगा रहा है तो कई सब्जी बेचने को मजबूर हैं।