टाइगर रिजर्व के बाहर बाघ और दूसरे वन्यजीवों की सुरक्षा पर मंथन के लिए एक कार्यशाला रामपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित की गई।
इसमें ग्लोबल टाइगर फोरम के सदस्य और वन विभाग के अफसर शामिल हुए हैं। बाघों के संरक्षण लिए अंतरराष्ट्रीय मदद भी मिलने की उम्मीद अधिकारी जता रहे हैं।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि पूरे देश 422 टाइगर ऐसे हैं, जो कि टाइगर रिजर्व के बाहर जंगलों में है। इन टाइगर पर खतरा ज्यादा है।
ऐसे में इनकी सुरक्षा और कैसे बेहतर की जाए, इसे लेकर प्रयास चल रहे हैं। ग्लोबल टाइगर फोरम डेविड लार्सन, एनटीसीए के पूर्व सेक्रेटरी राजेश गोपाल, बीके पटनायक ने विस्तार से संस्था के कार्य आदि के बारे में बताया।
उनका कहना था कि संस्था संरक्षण के जो मानक है, उनकी नियमित मानीटरिंग करेगी। अगर महकमा इसमें खरा उतरता है, तो उसे आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जाएगी।
वन संरक्षक पश्चिम वृत्त सुरेंद्र मेहरा ने कहा कि टाइगर रिजर्व के बाहर पूरे देश में हर चौथा बाघ पश्चिम वृत्त के अंदर है।
यहां पर वनाधिकारियों को वन्यजीव संरक्षण के अलावा अतिक्रमण, खनन, प्लांटेशन, वन भूमि हस्तांतरण से लेकर तस्करों, शिकारियों से भी निपटना होता है। ऐसे में चुनौती ज्यादा हैं।
मुख्य वन संरक्षक धनंजय मोहन ने बाघ संरक्षण के लिए उठायी गई योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान सीसीएफ कुमाऊं डा. राजेंद्र सिंह बिष्ट, डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते, सनातन, चंद्रशेखर सनवाल, एसडीओ प्रकाश आर्य, एनसी पंत, बीएस शाही समेत वन विभाग के सभी रेंजर मौजूद थे।