नैनीताल। हाईकोर्ट ने पौड़ी गढ़वाल के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को आदेश दिया है कि वह याचिकाकर्ता को 45 दिन के भीतर न्यूनतम वेतनमान दें। न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
कोटद्वार निवासी रितु उनियाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसने हिमालयन विवि से 2008 में बीएससी की डिग्री हासिल की थी। 18 सितंबर 2014 को पौड़ी गढ़वाल के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने संविदा-डेली वेजेज पर कंप्यूटर ऑपरेटर, एक्स-रे टेक्निशियन-रेडियोलॉजिकल टेक्निशियन एंड लैब टेक्निशियन के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था।
याचिकाकर्ता ने भी एक्स-रे टेक्निशियन के लिए आवेदन किया गया और उसका चयन हो गया और उसने कार्यभार भी संभाल लिया। याचिका में कहा गया कि पौड़ी के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने 20 फरवरी 2016 को आदेश पारित कर उसके वेतन को उच्चीकृत करते हुए साढे़ तीन सौ रुपये के स्थान पर पांच सौ रुपये प्रतिदिन कर दिया था। याचिकाकर्ता की ओर से न्यूनतम वेतनमान देने की प्रार्थना की गई थी। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 45 दिन के भीतर याचिकाकर्ता को न्यूनतम वेतनमान देने के निर्देश दिए हैं।