नैनीताल। हाईकोर्ट ने रोडवेज कर्मचारी यूनियन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद एमडी को 23 सितंबर तक शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि जवाब न देने की दशा में एमडी को स्वयं कोर्ट में पेश होना होगा। पूर्व सुनवाई में कोर्ट ने रोडवेज के एमडी को वेतन नहीं देने के मामले में शपथपत्र के साथ जवाब देने के निर्देश दिए थे लेकिन उनकी ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार रोडवेज कर्मचारी संघ ने एस्मा के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार निगम में कार्यरत संविदा और दैनिक वेतन कर्मचारियों को नियमित नहीं कर रही है और समय पर उन्हें वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। याचिका में कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारी देयकों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
आंदोलन के बाद सरकार और निगम प्रशासन के साथ कई बार समझौते हुए लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया। रोडवेज कर्मचारी फिर आंदोलन को मजबूर हो रहे हैं। सरकार को शांतिपूर्वक आंदोलन का नोटिस दिया गया लेकिन सरकार उनके खिलाफ एस्मा लगाने की चेतावनी दे रही है जो नियम विरुद्ध है। याचिका में कहा कि निगम का प्रदेश सरकार पर 45 करोड़ रुपये का बकाया है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम से भी 800 करोड़ रुपये अभी तक उत्तराखंड परिवहन निगम को नहीं मिले हैं। इस राशि के मिलने के बाद निगम की सारी समस्या का समाधान हो सकता है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एमडी को 23 सितंबर तक शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि जवाब न देने की दशा में एमडी को स्वयं कोर्ट मे पेश होना होगा।