बुधवार को हाईकोर्ट गेट से उत्तरकाशी पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए युवक को कोर्ट में पेश कराने के मामले में दायर याचिका पर हुई सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि गिरफ्तारी के बाद युवक को किस कोर्ट में पेश किया गया।
कोर्ट ने शुक्रवार 19 जून तक इसकी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने युवक की पत्नी के इस बयान के आधार पर कि वह अपने ससुराल जाना चाहती है, उत्तराखंड पुलिस को उसे ससुराल तक सुरक्षित पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। युवक के वकील सुहेल सिद्दीकी ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर बंदी को पेश करने की मांग की थी।
मामले के अनुसार उत्तरकाशी के बनोट गांव की रहने वाली युवती 21 मई को घर से गायब हो गई थी। 27 मई को उसके परिजनों ने धरासू थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि सहारनपुर का युवक बिलाल अहमद उसे अगवा कर ले गया है।
पुलिस तफ्तीश में मालूम हुआ कि युवती ने बिलाल के साथ 22 मई को सहारनपुर में शहर काजी के पास जाकर निकाह कर लिया था। युवक उत्तकाशी में जेसीबी चलाता था और इसी दौरान युवती से उसका प्रेम प्रसंग हो गया था।
परिजनों से खतरा बताते हुए निकाह के बाद दोनों ने 27 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुरक्षा की अपील की थी। जिसके बाद उन्हें सुरक्षा प्रदान कर दी गई।
नव दंपत्ति धरासू थाने में दर्ज रिपोर्ट के खिलाफ क्रास एफआईआर को लेकर बुधवार को नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचे थे। इस दौरान युवक को उत्तरकाशी पुलिस सुबह पौने आठ बजे हाईकोर्ट के गेट नंबर-1 के बाहर से उठाकर ले गई।
पुलिस की इस कार्रवाई के विरुद्ध याचिकाकर्ता के वकील सुहेल सिद्दीकी ने युवक को हाईकोर्ट में पेश करने के लिए याचिका दायर की थी।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को इस मामले में शुक्रवार तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है कि बंदी का किस कोर्ट में रिमांड कराया गया है तथा युवती के बयानों के आधार पर कि वह ससुराल जाना चाहती है, उत्तराखंड पुलिस को आदेशित किया है कि वह उसे सुरक्षित उसकी ससुराल तक पहुंचाए।