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गौरव ने स्वतंत्रता दिवस पर निभाया वायदा

Wed, 17 Aug 2016 12:39 AM IST
भूपेश कन्नौजिया
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गौरव ने स्वतंत्रता दिवस पर निभाया वायदा - फोटो : अमर उजाला
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आखिरकार 15 अगस्त को गौरव सिद्धार्थ ने ‘बावरी’ के दम पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड के लिए अपना नाम तय करवा ही लिया। स्वतंत्रता दिवस की सुबह 11 बजे गौरव का न केवल सपना पूरा हुआ बल्कि उसके सपने को पूरा कराने के लिए मन्नतें मांग रहे लोगों की मुराद भी पूरी हो गई।
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जगह थी हाईकोर्ट 11 स्ट्रीट, 4  ब्लाक, जयानगर, बंगलूरू और कर्नाटक सरकार की ओर से गौरव को फिनिशिंग लाइन पर भारतीय ध्वज के साथ उसके टारगेट पूर्ण होने की बधाई देने के लिए तैनात थे 98 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दोरे स्वामी।

23 वर्षीय गौरव  सिद्धार्थ अपनी बाइक बावरी  से वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने घर से 17  सितंबर 2015 में निकला था। इस स्वतंत्रता दिवस पर उसने अपना यह मुकाम हासिल कर लिया। नैनीताल के धारी ब्लाक के धानाचूली मूल निवासी सिद्धार्थ का हाल निवास लखनऊ गोमती नगर है।
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गौरव लखनऊ यूनिवर्सिटी से  मनोविज्ञान में ऑनर्स का छात्र रहा है। मनोविज्ञान का छात्र होने के नाते देशवासियों की मन:स्थिति को समझने के लिए ही उसने यह निर्णय लिया। अपनी हीरो इंपल्स मोटरसाइकिल जिसका नाम उसने बावरी रखा है से एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम करने निकला और इस गौरव को हासिल कर लिया।

उसे यह मौका रैंग्लर टू वंडर्स नामक ट्रेवल कंपनी ने दिया। इस दौरान ट्रैवलिंग में दिलचस्पी रखने वाले देश के सात युवाओं का चयन किया  गया था जिसमें वह भी शामिल था। 17 सितंबर 2015 को लखनऊ से यात्रा की  शुरुआत की थी।

उसका टास्क था इस पंद्रह अगस्त को एक देश में दोपहिया वाहन से चलने का डेनेल लिन का 78214 किमी का रिकॉर्ड तोड़ गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज करवाना। जिसे गौरव ने बखूबी निभाते हुए अपना लोहा मनवाया और 78230 किमी बाइक चला कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

यही नहीं उसने बताया कि 26 जनवरी 2017 को वह 1.20 लाख किमी दिल्ली में पूर्ण करेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मानित किया जायेगा। कर्नाटक सरकार द्वारा उसे रिकॉर्ड बनाने पर इनाम स्वरूप आठ लाख रुपये मूल्य की स्पोर्ट्स बाइक दी जाएगी।

कर्नाटक सरकार से प्रमाण पत्र मिलने के बाद औपचारिक तौर पर 26 जनवरी को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में उसका नाम दर्ज हो जाएगा। अमर उजाला से बातचीत में गौरव ने बताया कि वह अपना मिशन अच्छी तरह से पूरा कर पाया।

इसका सारा श्रेय अपने माता राधा बिष्ट और पिता कुंदन बिष्ट के साथ अपने मामा नथुवाखान मुक्तेश्वर को देता है। जिनकी हौसलाअफजाई की बदौलत उसने यह कामयाबी पाई। शेष बचे रिकार्ड बनाने के लिए वह निकल पड़ा है।
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