गौला हाथी कॉरिडोर में खनन करने की तैयारी है। सुरक्षा का हवाला देते हुए वन निगम ने वन विभाग और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मांगी है। इसके अलावा आईआईटी रुड़की ने इलाके में गौला से हो रहे कटाव से बचाव के लिए सुरक्षा स्ट्रक्चर बनाने की संस्तुति की है, उसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
गौला हाथी कॉरिडोर में खनन से और उसके कारण होने वाले नुकसान का मामला सामने आया था, उसके बाद केंद्रीय मंत्रालय ने खनन बंद करा दिया था। देवरामपुर क्षेत्र में करीब ढाई किमी के इलाके में खनन नहीं हो रहा है। करीब चार साल से उस इलाके को छोड़कर बाकी जगह से तो पत्थर निकाल लिया गया है, ऐसे देवरामपुर क्षेत्र में जमे पत्थर के कारण नदी का बहाव बदल रहा है।
जिससे आबादी और जंगल दोनों को नुकसान होने का खतरा है। उप प्रभागीय वनाधिकारी ध्रुव सिंह मर्तोलिया कहते हैं कि ऐसे में वन निगम ने इस इलाके में डेढ़ से दो मीटर तक खनन कराने का प्रस्ताव केंद्रीय वन मंत्रालय और उसकी कापी तराई पूर्वी वन प्रभाग को भेजी है।
इसके अलावा शांतिपुरी इलाके में नदी के कटाव से बचाव के लिए 50 स्पर, वायरकेट जाल आदि बनाने की योजना है। यह इलाके आईआईटी रुड़की टीम ने चिह्नित किये थे।
इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। स्वीकृत और राशि मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा। आरओ आरपी जोशी कहते हैं इसी इलाके में सुरक्षा मजबूत करने के लिए चौकी के अलावा नया गश्ती मार्ग भी तैयार किया जाएगा।