हल्द्वानी। गौला में उपखनिज सिमटने की कगार पर है, लेकिन वन विभाग ने अभी तक सैकड़ों ग्रामीणों के हक-हकूक के परमिट जारी नहीं किए। जबकि नियमानुसार वन विभाग हर खनन सत्र में ग्रामीणों को हक-हकूक के परमिट जारी कर एक निश्चित मात्रा में निशुल्क खनिज निकासी की अनुमति देता है।
प्रत्येक वर्ष 31 मई तक चलने वाले खनन सत्र में वन निगम गौला से लाखाें घनमीटर उपखनिज की निकासी करता है। इस सीजन में भी गौला से 18 लाख घनमीटर निकासी का लक्ष्य मिला है, जिसमें से वन निगम करीब 17 लाख घनमीटर की निकासी कर चुका है। लक्ष्य पूरा होने पर कुछ ही समय में गौला बंद होने की कगार पर है।
लेकिन अभी तक जो जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार वन विभाग ने अभी तक हक-हकूक के परमिट जारी नहीं किए हैं। हक-हकूक के जरिये करीब 100 से अधिक गांव के लोगों को परमिट देकर मुफ्त में चुगान की अनुमति दी जाती है, जिसके तहत एक परिवार एक परमिट पर 30 घनमीटर चुगान कर सकता है।
वर्तमान हालात के अनुसार गौला में उपखनिज सिमटने से गौला की गोद खाली हो चुकी है और वन विभाग कब तक परमिट जारी करने पर विचार करेगा इसका अंदाजा नहीं है। इस मामले में तराई पूर्वी वन प्रभाग के अधिकारी भी इस बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।