विघ्न विनायक गणपति की पूजा के साथ शहर में गणेश महोत्सव का श्री गणेश हो गया। रामलीला मैदान से लेकर शहर में जगह-जगह शोभायात्रा निकालकर गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई। श्रद्धालुओं के जयकारों से शहर गूंज उठा।
वैश्य महासभा के अध्यक्ष सुशील अग्रवाल के नेतृत्व में भक्त गणपति प्रतिमा के साथ रामलीला मैदान में आए। यहां विधिवत पूजा पाठ के बाद गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई। मैदान में गणपति के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ गई। श्री गणेश महोत्सव पटेल चौक ने गणेश प्रतिमा के साथ शोभायात्रा निकाली। इसके बाद पटेल चौक पर पूजा के साथ गणेश प्रतिमा स्थापित की गई। यहां बतौर मुख्य अतिथि वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते ने शिरकत की। रेलवे बाजार में धूमधाम के साथ गणेश प्रतिमा स्थापित की गई।
देवभूमि सामाजिक मंच ने गणेश प्रतिमा के साथ महावीर गंज से होते हुए मीरा मार्ग, सदर बाजार, पटेल चौक, साहूकारा लाइन, सिंधी चौराहा तक शोभायात्रा निकाली। मंच की तरफ से होली ग्राउंड में करीब छह फीट ऊंची गणपति प्रतिमा स्थापित की गई। नवयुवक संघ की तरफ ढोल-नगाड़े के साथ शोभायात्रा निकाली गई और पीसीएफ प्लाजा में रामबाग के राजा की प्रतिमा स्थापित की गई। इस दौरान सोनू पुरी, हेमंत शर्मा समेत कई लोग मौजूद थे।
कैनाल रोड पर महामृत्युंजय मंदिर परिसर में भी विधिवत रूप से गणेश प्रतिमा स्थापित की गई। मंगलपड़ाव में प्राचीन शिवमंदिर समिति ने गणेश प्रतिमा धूमधाम के साथ स्थापित किया। काठगोदाम हनुमान गढ़ी में गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई। यहां मुख्य अतिथि बीडीसी अर्जुन बिष्ट ने दीप प्रज्ज्वलित कर सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्य पुजारी कालू गिरी महाराज, उत्तम सिंह, विजय गिरी महाराज, शंभू गिरी आदि थे।
आज चंद्र दर्शन ठीक नहीं
डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश चतुर्थी पर्व मनाया जाता है। शिवपुराण और गणेश पुराण के अनुसार इसी दिन जगत का कल्याण करने के लिए गणेशजी का अवतार हुआ था। प्रत्येक कल्प में गणेशजी के अलग-अलग अवतार हैं। वक्रतुंड एकदंत, महोदर, गजानन, लंबोदर, विकट, विघ्नराज और धूम्रवर्ण ये आठ मुख्य अवतार माने जाते हैं। भगवान गणेश समस्त विघ्नों के नाशक और सर्वसिद्धि देने वाले देवता हैं। इसी कारण उन्हें गणाध्यक्ष कहा जाता है।
गणेश पुराण में लिखा है कि कलियुग में गणेश व देवी चंडी की उपासना प्रत्यक्ष फलदायी है। आज के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए। कहा जाता है जो मनुष्य आज चंद्र दर्शन करता है, उसके पुण्य क्षीण हो जाते हैं। गणेश पुराण के अनुसार एक बार विघ्न विनायक को देखकर चंद्रमा ने हंस दिया था। इसके बाद गणेशजी ने उनको अदृश्य होने का श्राप दे दिया। बाद में देवी-देवताओं की प्रार्थना पर गणेशजी ने सिर्फ एक दिन चंद्र दर्शन का निषेध कर चंद्रमा को अन्य दिनों के लिए श्राप से मुक्त कर दिया।