हल्द्वानी। तराई केंद्रीय वन प्रभाग के लालकुआं के कई गांवों में हाथियों का आतंक बढ़ा है। फसलों का वह नुकसान कर रहे हैं। इनकी नजर गन्ने पर ज्यादा है। खासकर गन्ना की अर्ली (शुरुआती) व नरम प्रजाति सीओ-118 के लिए तो गजराज कई किमी का पैदल सफर तय कर रहे हैं। क्षेत्र में भी इस बार इसे ज्यादा लगाया गया है। नरम और मीठा होने के कारण गजराज इसका लुत्फ उठाने की पूरी जुगत में हैं। जिन गांवों में फेंसिंग हैं वहां तक आने के लिए वह 10 से 12 किमी घूमकर अपना सफर तय कर रहे हैं। बुधवार की रात भी दो हाथी अपने बच्चे के साथ गंगापुर कबड़वाल के आसपास पहुंच गए। वन विभाग के अनुसार इस जगह से उन्हें हटाया गया था लेकिन वह काफी दूरी तय कर पहुंचे।
इन गांवों में है हाथियों का ज्यादा आतंक
लालकुआं क्षेत्र के भानदेव, नवाड़, राधा बंगर, हरिपुर बच्ची, कृष्णा नवाड़, गंगापुर, कबड़वाल, हल्दूचौड़ जग्गी, मोटाहल्दू के आसपास के गांव में हाथियों का ज्यादा आतंक है। यहां फसलों तक यह पहुंच रहे हैं। इनके हमले रात में ज्यादा हो रहे हैं। इन गांवों में इस बार अर्ली गन्ने की प्रजाति ज्यादा लगाई गई है। ऐसे में हाथियों का टारगेट यह फसल ज्यादा है।
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गन्ना ही क्यों पसंद है हाथियों को
वन्य जीव विशेषज्ञ उप निदेशक यूएफटीआई सूरज तिवारी कहते हैं कि गन्ना की फसल हाथियों के लिए आसान और सुलभ स्रोत है। इसमें पोषक तत्वों की मात्रा अधिक रहती है। उच्च मात्रा में शर्करा होती है। ऊर्जा और पानी का अच्छा स्रोत भी है। प्यास बुझाने का अच्छा तरीका है। जंगल में अन्य वनस्पति का विकल्प सीमित होने से वह गन्ने की ओर आकर्षित होते हैं।
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कोट...
लालकुआं क्षेत्र के कई गांवों में हाथियों के फसल बर्बाद करने की जानकारी सामने आ रही है। प्रभावित किसानों को मुआवजा भी दिलाया जा रहा है। अब तक की जांच में सामने आया है कि वह गन्ने की अर्ली प्रजाति की ओर वह ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। इसके लिए वह फेसिंग से बचने के लिए 10 से 12 किमी तक पैदल चलकर वापस उसी जगह आ रहे हैं।
ललित मोहन जोशी, रेंजर हल्द्वानी, तराई केंद्रीय वन प्रभाग