फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नागा संधि के हीरो गजेंद्र सिंह रावत का निधन

विज्ञापन
फाइल फोटो लेफ्टिमेंट जनरल जीएस रावत
विज्ञापन
हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल से सेना में लेफ्टिनेंट जनरल रैंक तक पहुंचने वाले पहले सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल गजेंद्र सिंह रावत का नोएडा में सोमवार को निधन हो गया। वह 94 साल के थे। नार्थ ईस्ट में जब नागा उग्रवाद चरम पर था, उस समय जनरल रावत ने बड़ी भूमिका निभाई। भारतीय सेना को वर्तमान ढांचे में लाने में उन्होंने काफी योगदान दिया।
विज्ञापन

130 वर्ष से देश सेवा कर रहा ले.ज. रावत का परिवार
जिला पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष मेजर बीएस रौतेला के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल जीएस रावत 17 दिसंबर 1926 को पिथौरागढ़ जिले के बूंगाछीना (देवलथल) में हुआ था। वह ऐसे परिवार से हैं, जो 130 वर्षों से सेना में सेवाएं दे रहा है। उनके परदादा और दादा ने तृतीय गोरखा रेजीमेंट में जूनियर कमीशंड अफसर के तौर पर सेवाएं दीं थीं। उनके पिता ब्रिगेडियर एनएस रावत सेना में 32 साल की सराहनीय सेवा करने के बाद रिटायर हुए थे। भारतीय नौसेना में कमांडर रहे उनके छोटे भाई एमएस रावत कोे 1952 में राष्ट्रपति स्वर्ण पदक से नवाजा गया था। उनके छोटे भाई ने गढ़वाल राइफल्स के कैप्टन के तौर पर 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध भी लड़ा था।
जम्मू-कश्मीर ऑपरेशन में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
ले.ज. जीएस रावत ने शेरवुड और सेंट जोसेफ कालेज नैनीताल से पढ़ाई की। 1946 में जब वह इलाहाबाद विवि से बीएससी की पढ़ाई कर रहे थे उसी दौरान उनका सेना में सीधे कमीशन से चयन हो गया। 21 दिसंबर 1947 को गोरखा राइफल्स (फ्रंटियर फोर्स) में कमीशन अधिकारी के तौर नियुक्ति मिली। उन्होंने 1948 में जेएंडके ऑपरेशन में बटालियन के साथ जोजिला ऑपरेशन और कारगिल कब्जे के ऑपरेशन में भी हिस्सा लिया था।
विज्ञापन

यूपी तिब्बत बॉर्डर पर स्काउट बटालियन का किया था गठन
उन्होंने 1957-58 में वेलिंगटन में डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज कोर्स भी किया था। वह 1959-62 तक इंफैंट्री स्कूल मऊ में इंस्ट्रक्टर भी रहे। उन्होंने यूपी तिब्बत बॉर्डर पर स्काउट बटालियन का गठन कर 1964 से 1966 तक इसकी कमांड की। 1966-69 वह डिफेंस सर्विस स्टाफ कालेज के इंस्ट्रक्टर रहे। अप्रैल 1969 से मई 1971 तक उन्होंने इंफैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली थी। वर्ष 1971-72 तक हेडक्वार्टर कोर्प में वह ब्रिगेडियर जनरल (स्टाफ) रहे। इंफैंट्री डिविजन में उन्होंने जनवरी 1974 से जुलाई 1974 तक जनरल आफिसर कमांडिंग का दायित्व निभाया।
ले.ज. रावत के कार्यकाल में ही हुई थी नागा संधि
उन्हें नागालैंड और मणिपुर के माउंटेन डिविजन में तैनाती मिली जहां पूर्व जनरल कमांडिग अफसर घायल हो गए थे। उनके कार्यकाल में ही नागा संधि हुई थी। वह देहरादून मिलिट्री एकेडमी में भी कमांडेंट रहे। वर्तमान में वह नोएडा में रह रहे थे। कुछ समय तक वह एमबीपीजी डिग्री कॉलेज के पास अपने आवास पर भी रहे। उनके पिता ब्रिगेडियर एनएस रावत अंग्रेजों के समय से भारतीय सेना में अधिकारी थे। लेफ्टिनेंट जनरल रावत ने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में सक्रिय भूमिका निभाई। वह फरवरी 1979 से जून 1979 तक दिल्ली में जनरल आफिसर कमांडिग भी रहे।
आज सुबह होगी शोकसभा
मेजर बीएस रौतेला ने बताया कि मंगलवार की सुबह 11 बजे जगदंबानगर स्थित लीग कार्यालय में शोक सभा होगी। सभी पूर्व सैनिक उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए इकट्ठा होंगे।
पूर्व सैनिक अधिकारियों में शोक
कैप्टन सुरेंद्र रावत ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल जीएस रावत कुमाऊं के निधन से उत्तराखंड को एक बड़ी क्षति पहुंची है। मेजर बीएस रौतेला ने कहा कि नागा संधि में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को देश भुला नहीं सकता है। पूर्व सैनिक देवेंद्र दफौटी ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल जीएस रावत पर उनको हमेशा गर्व रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें