रामनगर के गुलजारपुर के लोगों ने जंगल से अवैध सड़क बनाने को लेकर मोर्चा खोल दिया है। गांव वालों ने तराई पश्चिम वन प्रभाग के डीएफओ को एक ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई करने की मांग की। गांव वालों ले धमकी दी है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
रामनगर में बीते दिनों वीरपुर लच्छी गांव में स्टोन क्रशर संचालक और गांव वालों का विवाद हुआ था। बाद में लोग एकजुट हुए और रामनगर तक बंद किया गया। अभी इस घटना के बीते कुछ ही दिन हुए है कि गुलजारपुर इलाके में भी ऐसे ही हालात बनने लगे हैं। बड़े नेताओं के कथित शह और सरपरस्ती में दबंग ने जबरन जंगल के बीच से सड़क बना दी है। जबकि बिना वन भूमि हस्तांतरण कर आरक्षित वन भूमि में कुछ भी नहीं हो सकता। पर वन महकमा कुछ नहीं कर सका। वह केवल लकीर पिटने में लगा है।
अब ग्रामीणों ने अवैध सड़क लेकर मोर्चा खोला है। गुलजार पुर के बड़ी संख्या में ग्रामीण डीएफओ से मिले और बलबीर, कन्हैया, अवतार सिंह, बलविंदर सिंह, सुभाष आदि के हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि जहां पर रास्ता बनाया गया हे, वहां करीब में प्राइमरी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और गुरुद्वारा है। अगर भारी वाहन चलेंगे, तो उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा होगा। वहीं, अधिकारी पुराना राग ही अलाप रहे हैं। डीएफओ राहुल का कहना है कि ज्ञापन मिला है, आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
वन संरक्षक को स्थिति का पता नहीं
जंगल में अवैध सड़क बन गई, ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया। लेकिन, पांच प्रभागों की जिम्मेदारी संभालने और महत्वपूर्ण अधिकारी वन संरक्षक पश्चिम वृत्त को इसकी बहरहाल खबर नहीं है। जब खुलेआम आरक्षित वन भूमि में सड़क बनने के बारे में वनाधिकारी को नहीं पता चल पा रहा है, तो जंगल में अंदर क्या हो रहा होगा, उसकी खबर कितनी होगी अंदाजा लगाया जा सकता है। इस बाबत वन संरक्षक सुरेंद्र मेहरा का कहना है कि घटना की जानकारी नहीं है। डीएफओ से पता किया जाएगा। पर आरक्षित वन भूमि में सड़क बनाना पूरी अवैध और गलत है। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हुआ।