फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चौथा नैनीताल फिल्म फेस्टिवल शुरू

Tue, 03 Nov 2015 12:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल।
विज्ञापन
विज्ञापन
युगमंच, जन संस्कृति मंच और नैनीताल फिल्म सोसायटी के सहयोग से सोमवार से नैनीताल क्लब के शैले हाल में चौथा नैनीताल फिल्म फेस्टिवल शुरू हुआ। फिल्म फेस्टिवल कवि वीरेन डंगवाल और एमएम कलबुर्गी को समर्पित किया गया है।
विज्ञापन


फेस्टिवल का शुभारंभ करते हुए आलोचक और जन संस्कृति मंच के महासचिव प्रणय कृष्ण ने प्रसिद्ध साहित्यकार एमएम कलबुर्गी, नरेंद्र दाभोलकर और पानसंकर की हत्या किए जाने को महज व्यक्तियों की हत्या होने से इंकार करते हुए कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने जैसा है।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर समेत उत्तर प्रदेश के दादरी में हुई घटनाएं यह बताने को पर्याप्त हैं कि देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यह देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ साजिश है, लेकिन रचनाकार, फिल्म निदेशक सच्चाई दिखाने से पीछे नहीं हटेंगे।
विज्ञापन


लेखक और फिल्म निर्माता संजय जोशी ने साहित्यकारों ने सम्मान लौटाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इन दिनों तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से अच्छी फिल्मों का निर्माण आसान हो गया है। उन्होंने जनसंघर्षों संबंधी फिल्में शहरी दर्शकों तक पहुंचाने की जरूरत बताई।

प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. शेखर पाठक ने कहा कि वर्तमान दौर साहित्यकारों व रचनाकारों के लिए कठिन है। वर्तमान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पहरा है। इस विषम परिस्थिति के लिए उन्होंने वर्तमान सरकार के साथ साथ पूर्ववर्ती सरकारों को भी जिम्मेदार माना।

प्रो. पाठक ने राज्य निर्माण से लेकर अब तक आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप काम न होने पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति आपसी मेलजोल और सर्वधर्म समभाव की है। इसमें धार्मिक आधार पर भेदभाव की गुंजाइश नहीं है।

युगमंच के निदेशक जहूर आलम ने बताया कि नैनीताल फिल्म फेस्टिवल में उद्देश्य पूर्ण फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इस क्रम की शुरूआत प्रतिरोध का संगीत से हुई। इस म्यूजिक वीडियो को ये हिटलर के साथी का नाम दिया है। इसके बाद लोक लोक शाहिर शम्भाजी भगत का संगीत ‘चल चलिए’, शीतल साठे की ‘तुम हमें नहीं मिटा पाओग’ की प्रस्तुति हुई। अंत में सुदर्शन जुयाल की हिंदी फीचर फिल्म हंसा का प्रदर्शन किया गया।

इससे पूर्व कवि वीरेन डंगवाल की ‘याद में आएंगी उजले दिन जरूर होगा’ कविता की प्रस्तुति की गई। इसके बाद उनके पुनर्प्रकाशित पहले कविता संग्रह ‘इसी दुनिया में’ का विमोचन किया गया।

इस मौके पर कवि वीरेन डंगवाल की पत्नी रीता डंगवाल, पुत्र प्रफुल्ल डंगवाल, भाई शैलेंद्र डंगवाल और उनकी पत्नी अनीता डंगवाल समेत अन्य परिजनों के साथ ही हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार गुप्ता, साहित्यकार प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट बटरोही, प्रो. उमा भट्ट, डा. गिरिजा पाठक, हरीश पाठक, राजा साह, हरीश पंत, मुन्नी तिवारी, डा. शीला रजवार, करुणा अधिकारी, प्रदीप पांडे, विनोद पांडे, भाष्कर बिष्ट, नवीन बेगाना आदि मौजूद थे।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें