रामनगर। कार्बेट पार्क के बिजरानी रेंज में गश्त के दौरान एक नर हाथी का सड़ागला शव मिलने से विभाग में खलबली मच गई। मौके पर पहुंचे विभागीय अधिकारियों और पशु चिकित्सकों ने जांच और पोस्टमार्टम के बाद शव को दफना दिया। हाथी की मौत के कारणों को जानने के लिए फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। हाथी के दोनों दांत सुरक्षित थे।
कार्बेट पार्क के पार्क वार्डन शिवराज चंद ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 10 बजे बिजरानी रेंज के गश्ती दल को फूलताल ब्लॉक आमस्रोत बीट कक्ष संख्या 10 सांवल्दे के पास झाड़ियों से दुर्गंध आई। जांच में जब कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो झाड़ियों में एक नर हाथी का शव पड़ा था। दल की सूचना पर अधिकारी और पशु चिकित्सक मौके पर पहुंचे। अधिकारियों और गश्ती दल के सदस्यों ने शव के चारों ओर करीब आधा किमी दूर तक कांबिंग की, लेकिन कोई भी संदिग्ध गतिविधि नजर नहीं आई।
बाद में पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत शर्मा और डॉ. योगेश अग्रवाल द्वारा पोस्टमार्टम करने के बाद शव को दफना दिया गया। पशु चिकित्सकों के मुताबिक शव करीब 15-20 दिन पुराना था। हाथी की उम्र करीब 12 साल बताई जा रही है। उसके शरीर के सभी अंग सुरक्षित थे। इस दौरान कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक अमित वर्मा, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के चंदन सिंह नेगी, पार्क वार्डन शिवराज चंद, कार्बेट फाउंडेशन की दीपा, रेंजर राजकुमार समेत कई वनकर्मी मौजूद थे।
हल्द्वानी । शनिवार को कार्बेट में मारे गए हाथी की मौत ने वन विभाग के सामने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं। हाथी के शव पर बाघ के दांत और पंजों के निशान मिले हैं। यह हाथी और बाघ के संघर्ष की ओर इशारा कर रहा है। हाथी के कमजोर और भूखा होने से भी पार्क प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। यह तथ्य कार्बेट में बिगड़ते खाद्य चक्र की ओर भी इशारा कर रहा है।
हाथी की मौत के बाद कार्बेट प्रशासन भी सकते में है। वन विभाग के अनुसार हाथी के शव को बाघ ने खाया था। बाघ के दांतों और पंजों के निशान इसकी पुष्टि कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि बाघ ने हाथी को मार कर आहार बनाया है तो यह कार्बेट में हाथी और बाघ में संघर्ष शुरू होने की ओर इशारा कर रहा है। हाथी और बाघ का संघर्ष आसानी से देखने को नहीं मिता।
जाहिर है कि यह विकट परिस्थितियां ही रही होंगी जिन्होंने बाघ या हाथी में से किसी एक को इस हद तक जाने को विवश किया। कार्बेट में हाथियों के साथ ही बाघ भी खासी संख्या में हैं। मरने वाला हाथी भी टस्कर है और यह गुत्थी को और उलझा दे रहा है। टस्कर से बाघ किन परिस्थितियोें में टकराया यह भी वन विभाग को परेशान किए हुए है।
वन्य विशेषज्ञों की माने तो बाघ सिर्फ कमजोर, छोटे हाथी को ही निशाना बनाता है। यह हाथी भी कमोजर और भूखा था। इस वजह से बाघ का आहार बन गया था। वरना टस्कर से टकराने पर नजारा दूसरा हो सकता था। हाथी के भूखे और कमजोर होने ने भी वन विभाग को परेशानी में डाला है। यह इशारा इस ओर भी है कि कार्बेट में हाथी के लिए पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है। की वजह से हाथी कमजोर और बीमार हो रहे हैं। यानी कि कार्बेट के जंगल में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी खाद्य चक्र बिगड़ रहा है। कुछ इसी तरह से वन विभाग अभी दिन पहले टनकपुर में बस्तिया की बाघिन को देखकर हैरान रह गया था। राइफल से दस गोलियां चलाने के बाद भी यह बाघिन टस से मस नहीं हुई थी।
हाथी के शरीर पर बाघ के खाने के निशान मिले हैं, यह कह पाना मुश्किल है कि बाघ ने हाथी को मार कर खाया या मरा हुआ हाथी तो उसे निवाला बनाया। फिलहाल सभी पहलूओं को ध्यान में रख कर जांच की जा रही है।
-अमित वर्मा, उपनिदेशक, जिम कार्बेट