नैनीताल। हाईकोर्ट में ज्योलीकोट और उसके आसपास के गांवों गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान तथा सरियाताल में दूषित पेयजल के कारण फैली जल जनित बीमारियों के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्यचिकित्सा अधिकारी, उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबन्धक और उत्तराखंड पेयजल निगम कुमाऊं मंडल के मुख्य अभियंता व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने सरकार से कहा है कि जल जनित रोगों का समाधान करने के लिए एक नई एसओपी बनाए और उसे पूरे प्रदेश में लागू करें ताकि भविष्य में जल जनित रोग से किसी को कोई परेशानी न उठानी पड़े।
कोर्ट ने कहा कि जो लोग अशुद्ध जल पीने से बीमार हुए वे जल संस्थान व अन्य की लापरवाही के कारण हुए, अगर समय समय और हर सीजन के दौरान टेंकों की सफाई की जाती तो यह मामला इतना बड़ा न होता। सुनवाई पर कोर्ट ने सभी अधिकारियों की अगली तिथि को उनकी व्यक्तिगत पेशी को माफ कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार पिछले तीन माह से इस क्षेत्र में डायरिया और पीलिया जैसी बीमारियां फैलने, दो लोगों की मौत होने तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होने के मामले को लेकर बेलुवाखान निवासी अधिवक्ता रवि बिष्ट ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में मामले का उल्लेख करते हुए विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता का मुद्दा उठाया गया तथा प्रभावितों के नि:शुल्क इलाज व स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की मांग की गई।