हल्द्वानी/लालकुआं। अवैध खनन कराकर कथित तौर पर रिश्वत मांगने का वन दरोगा का ऑडियो वायरल होने के बाद तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ ने गौला रेंज के इस आरोपित वन दरोगा को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच एसडीओ सितारगंज को सौंपी गई है। वहीं, वन क्षेत्राधिकारी (गौला) को डीएफओ कार्यालय से अटैच कर दिया है।
सोमवार को सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हुआ। इसमें वन दरोगा अवैध खनन से जुड़े व्यक्ति से अवैध खनन के बदले लेनदेन जैसी बात करता सुनाई दे रहा है। वहीं, अवैध खनन करने वाला व्यक्ति पकड़े जाने पर किसी को रकम देने की बात कह रहा है, लेकिन वनाधिकारी उसे ही महीना देने की बात कहता है। ऑडियो में 60 से 70 हजार रुपये महीने की 14 तारीख को देने की बात भी कही जा रही है।
प्रभागीय वनाधिकारी नीतीशमणि त्रिपाठी के संज्ञान में मामला आने पर उन्होंने गौला रेंज के कर्मचारियों और वन क्षेत्राधिकारी से ऑडियो की जांच कराई। इसमें रिश्वत मांगने वाले की पुष्टि गौला रेंज के वन दरोगा कैलाश चंद्र कपिल के रूप में हुई है। इस पर डीएफओ त्रिपाठी ने कैलाश चंद्र कपिल को निलंबित कर मामले की जांच एसडीओ सितारगंज को सौंप दी है। मामले में वन क्षेत्राधिकारी गणेश चंद्र त्रिपाठी को भी डीएफओ कार्यालय से संबद्ध किया गया है। वहीं, वन क्षेत्राधिकारी रनसाली आरपी जोशी को गौला रेंज का अतिरिक्त चार्ज देने की बात कही गई है।
रिश्वत न देने पर मुझे फंसाया गया है
मुझे साजिशन फंसाया गया है। कुछ दिन पूर्व बिंदुखत्ता निवासी एक युवक ने उन्हें फोन कर उसके पास एक ऑडियो होने की बात कही और 20 लाख रुपये की मांग की। कुछ देर बाद युवक ने उन्हें एक ऑडियो भेजा, जिसमें उनकी आवाज को एडिट किया था।
इस संबंध में वह युवक के घर भी बात करने पहुंचे, जहां उसने 12 लाख रुपये की डिमांड की। इसके बाद युवक ने उन्हें व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर 10 लाख रुपये की मांग की। मैंने रिश्वत मांगने वाले युवक के वाहन अवैध खनन में सीज किए हैं। इस कारण युवक ने मुझे झूठे आरोप में फंसाया है। -कैलाश चंद्र कपिल, वन दरोगा।
कपिल एक माह बाद होने वाले थे सेवानिवृत्त
भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे वन दरोगा कैलाश चंद्र कपिल को भी अगले माह सेवानिवृत्त होना है, लेकिन इससे पहले ही एक ऑडियो वायरल होने के बाद उन्हें निलंबन की कार्रवाई झेलनी पड़ी है। कपिल वन विभाग के एक कर्मचारी यूनियन के नेता भी हैं।
प्रमोशन के बाद अवमुक्त होने थे रेंजर
डीएफओ नीतीशमणि त्रिपाठी द्वारा जारी आदेश में वन क्षेत्राधिकारी गणेश चंद्र त्रिपाठी को डीएफओ कार्यालय से संबद्ध किया है। करीब दो माह पूर्व ही गणेश चंद्र त्रिपाठी पदोन्नत होकर एसडीओ बने थे और उन्हें रानीखेत वन प्रभाग का चार्ज मिला था। कुछ दिन बाद ही उन्हें तराई पूर्वी वन प्रभाग से रेंजर के पद से अवमुक्त होना था।
अवैध खनन के संबंध में एक ऑडियो वायरल हुआ था। इसमें वन दरोगा कैलाश चंद्र कपिल द्वारा फोन पर लेनदेन की बात की जा रही है। इसे उत्तराखंड सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन मानते हुए वन दरोगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। आरओ गणेश चंद्र त्रिपाठी को भी मामले में लापरवाह मानते हुए डीएफओ कार्यालय से संबद्ध कर जांच की जा रही है।- नीतीश मणि त्रिपाठी,
प्रभागीय वनाधिकारी तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी
अवैध खनन कराकर कथित रूप से रिश्वत मांगने वाले वन दरोगा को खनन माफिया मामू कहकर संबोधित करते थे। मंगलवार को वायरल हुए ऑडियो में भी वन दरोगा को मामू कहा जा रहा है। इससे पूर्व भी वन विभाग में भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर हुए हैं।
मंगलवार को अवैध खनन का एक कथित ऑडियो वायरल होने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने वन दरोगा कैलाश चंद्र कपिल के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है, लेकिन इससे पहले भी वन महकमे में भ्रष्टाचार के मामले उजागर हुए हैं।
दो अप्रैल 2019 को सतर्कता विभाग ने रामनगर में तैनात वन दरोगा शैलेंद्र चौहान को एक लाख रुपये की घूस लेते हुए गिरफ्तार किया था। वर्ष 2002 से 2004 के बीच वन विभाग के गौला गेट पर फर्जी रवन्ना के मामले में भी एक घोटाला उजागर हुआ था। इसमें 2009 में मुकदमा दर्ज होने के बाद वन विभाग ने 34 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। इधर, मंगलवार को वायरल हुए ऑडियो में वन दरोगा और खनन माफिया ने कई और लोगों के नाम भी लिए हैं। इसमें वन विभाग के अधिकारी कुछ अन्य वनकर्मियों और खनन माफिया के लिप्त होने का भी अंदेशा जता रहे हैं। माना जा रहा है कि मामले की जांच के बाद कुछ और वनकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
खनन माफिया को अर्ल्ट करते थे मामू
कथित तौर पर फंसे वन दरोगा कैलाश चंद्र कपिल अवैध खनन का कारोबार चलाने के लिए खनन माफिया को वन विभाग के गश्ती दल की सूचना देकर भी अलर्ट करते थे। मंगलवार को वायरल हुए ऑडियो में भी मामू खनन माफिया को गश्ती दल के सक्रिय होने के कारण रात में वाहन नहीं चलाने और घोड़ा बुग्गी भी कम चलाने की बात कह रहे हैं और खनन माफिया दिन में ही वाहन चलाने की बात कहा रहा है।
14 से 14 तारीख चलता था महीना
वायरल ऑडियो में इस बात का भी खुलासा हुआ कि खनन माफिया वन दरोगा को महीने की 14 तारीख को घूस की रकम पहुंचाते थे और 14 से 14 महीना चलता था। ऑडियो वायरल होने से पहले वन दरोगा के शहर से बाहर होने के कारण किसी और ने महीना एक से 30 तारीख का बांध दिया। इसकी भनक वन दरोगा को लगने के बाद उन्होंने खनन माफिया से इसे ठीक करने को कहा। इसी में खनन माफिया 60 हजार पहले देने और 10 हजार बाद में देने की बात भी कह रहा है।