रामनगर (नैनीताल)। मरचूला बाजार में बाघिन की मौत के मामले में फायर झोंकने वाले वन आरक्षी पर केस दर्ज कर उन्हें पलेन रेंज से संबद्ध कर दिया है। डीएफओ कालागढ़ ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम में बाघिन का पेट खाली था और फेफड़े में सेही का कांटा भी फंसा था।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व पार्क के निदेशक डॉ. धीरज पांडेय ने बताया कि प्राथमिक जांच के आधार पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धाराओं के तहत बाघिन की मृत्यु से संबंधित केस टू वन आरक्षी धीरज सिंह के विरुद्ध दर्ज किया गया। वन आरक्षी को कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग की पलेन रेंज कार्यालय संधीखाल से संबद्ध कर दिया गया है। डीएफओ कालागढ़ ने इस केस की जांच के लिए एसडीओ हरीश नेगी को जांच अधिकारी नामित किया है। इस प्रकरण की जांच जारी है।
हिसंक हो चुकी थी बाघिन: निदेशक
कॉर्बेट पार्क के निदेशक ने बताया कि 14 नवंबर रात करीब 8.15 बजे कालागढ़ टाइगर रिजर्व पार्क के अंर्तगत बाघिन मरचूला बाजार में घुसकर हिंसक हो गई थी। सूचना पर मंदाल रेंज के रेंजर तत्काल स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे। हिंसक हुई बाघिन से जानमाल की रक्षा के लिए 315 बोर की राजकीय राइफल से नौ राउंड हवाई फायर कर उसे मरचूला बाजार और आबादी क्षेत्र से जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश की। उसके बाद भी बाघिन बार-बार लोगों के घरों और दुकानों में घुसने का प्रयास कर रही थी। एक समय ऐसी स्थिति आई कि बाघिन घरों के बीच में पहुंच गई और बहुत हिंसक हो गई। बाजार में अनगिनत लोग छतों में खड़े थे। इस वजह से हवाई फायर नहीं किए जा सकते थे।
कॉर्बेट निदेशक ने बताया कि जनता की सुरक्षा के उद्देश्य से वन आरक्षी धीरज सिंह ने 12 बोर की बंदूक से दो राउंड नीचे जमीन पर फायर किए। इसमें से एक राउंड की फायर के छर्रे बाघिन के दाहिने जांघ पर लग गए। घटना की सूचना मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उत्तराखंड को उसी समय दी गई। उन्होंने प्रकरण की दो दिन के भीतर प्राथमिक जांच करे के निर्देश मिले। बाघिन मौत होने पर उसके शव का ढेला रेस्क्यू सेंटर में पोस्टमार्टम किया गया।
एनटीसीए के मानकों पर हुआ पोस्टमार्टम
कॉर्बेट निदेशक ने बताया कि एनटीसीए की एसओपी के मानकों के अनुसार निर्धारित कमेटी के एजी अंसारी, एनटीसीए के नामित प्रतिनिधि कुंदन सिंह खाती, एनजीओ के नामित प्रतिनिधि ललित अधिकारी और मनोज सती शामिल थे। कालागढ़ टाइगर रिजर्व के डीएफओ की मौजूदगी में वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा और डॉ. हिमांशु पांगती ने शव का पोस्टमार्टम किया।
अत्यधिक रक्तस्राव से हुई बाघिन की मौत
कॉर्बेट निदेशक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बाघिन की मृत्यु दाहिने पैर की जांघ में छर्रे लगने पर शरीर से बहुत अधिक खून निकलने से हुई थी। मादा बाघ के लीवर में लगभग 10 सेमी का एक सेही का काटां भी पाया गया। इससे लीवर को भी काफी क्षति हो गई थी। बाघिन का पेट और आंतें पूरी तरह खाली थीं। उसके फेफड़ों में भी क्षति हुई है। बाघिन के दाहिने जांघ में 12 बोर की बंदूक के छर्रे पाए गए।