नैनीताल। शहर में 123 वर्षों से आयोजित किए जा रहे मां नंदा सुनंदा महोत्सव के तहत मैया से मांगी गई मन्नत के अनुरूप बलि प्रथा का प्रचलन भी है लेकिन आयोजन स्थल नयना देवी मंदिर में बलि नहीं दी जाती है।
हाईकोर्ट के वर्ष 2011 के आदेशों के क्रम में महोत्सव के प्रवेश द्वार पर बकरों का पंजीकरण किया जाता है। यहां से सुरक्षा के साथ बकरों को मंदिर में पूजा के लिए लाया जाता है फिर सुरक्षित गेट तक छोड़ा जाता है। इसके बाद पशु वधशाला में बलि दी जाती है। इस वर्ष 104 बकरों का पंजीकरण कर पूजा अर्चना की गई। श्रद्धालु माता से मांगी मन्नत के क्रम में बलि देते हैं। बलि प्रथा को लेकर हाईकोर्ट में चले वाद के क्रम में 19 दिसंबर 2011 को हाईकोर्ट ने मानकों के तहत संचालित स्लाॅटर हाउस में ही बलि किए जाने के निर्देश दिए। तब से जिला व पुलिस प्रशासन की व्यवस्था के तहत पंजीकरण व टोकन देने के बाद बकरों को मंदिर तक पूजा के लिए ले जाया जाता है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमा राठौर ने बताया कि इस वर्ष पूरे महोत्सव में 104 बकरे बलि के लिए लाए गए। पंजीकरण के बाद पुलिस सुरक्षा के साथ उनका मंदिर में पूजन कराया गया।